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अज्ञान के अंधकार में डूबे समाज को नारी शिक्षा की रोशनी दी थी सावित्री बाई फुले ने

अज्ञान के अंधकार में डूबे समाज को नारी शिक्षा की रोशनी दी थी सावित्री बाई फुले ने
लेख
30-Dec-25

लेखक - राजेश दोड़के

क्या आपने कभी सोचा है कि शिक्षा की असली जननी कौन है? क्या आपने कभी यह प्रश्न उठाया कि जब समाज की आधी आबादी अंधकार में थी, तब कौन सी स्त्री ने सबसे पहले दीपक जलाया? क्या यह आसान था कि एक स्त्री समाज की गालियाँ सहे, पत्थर खाए, लेकिन फिर भी स्कूल तक पहुँचे? कौन थी वह माँ, जिसने अपने खुद के बच्चे न होने पर भी, अनाथ बच्चों को गोद से भी ज्यादा दुलार दिया?

क्या यह सच नहीं कि सावित्रीबाई फुले ने उस जमाने में लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया, जब लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था? क्या यह प्रश्न नहीं खड़ा होता कि बिना किसी स्वार्थ के, बिना किसी व्यक्तिगत लालसा के, उन्होंने क्यों इतना बड़ा त्याग किया? क्या यह अद्भुत नहीं कि उन्होंने मातृत्व का विस्तार केवल जन्म देने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे समाज को ही अपनी संतान मान लिया?

क्या आप मानते हैं कि ऐसी स्त्री को केवल सामान्य मां कहा जा सकता है? या फिर यह उचित नहीं कि उन्हें शिक्षा की देवी कहा जाए? क्या हम सच में कभी उन्हें भूल सकते हैं, जिन्होंने हमें यह सिखाया कि शिक्षा ही सबसे बड़ा अस्त्र है? तो क्या यह सवाल हमारे सामने हमेशा नहीं रहेगा -
कि जब-जब शिक्षा की बात होगी, सबसे पहले नाम माता सावित्रीबाई फुले का क्यों आएगा?

माता सावित्रीबाई फुले के जीवन के उन पहलुओं को प्रश्नवाचक शैली में वीडियो भी बनाया गया है। वीडियो में बताया गया है कि कैसे उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाज के लिए, अनाथ बच्चों के लिए और खासकर स्त्रियों की शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया। यह कहानी हर भारतीय को सुननी चाहिए, ताकि हम समझ सकें कि आज जो शिक्षा हमें सहज उपलब्ध है, उसके लिए सावित्रीबाई फुले ने कितना बड़ा संघर्ष किया था।
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