रामाकोना की कन्या शाला बनी तालाब, घुटनों तक पानी में पहुंच रहे बच्चे
छिंदवाड़ा
08-Jul-25
एक कमरे में सिमटी बच्चों की पढाई
रामाकोना
'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और 'स्कूल चले हम' जैसी योजनाएं कागजों पर दम भर रही हैं, जबकि ज़मीनी सच्चाई इसके उलट है। रामाकोना की शासकीय कन्या एवं प्राथमिक शाला बारिश के चलते एक बार फिर जलभराव की चपेट में आ गई है। पिछले 11 दिनों में दो बार मामला सामने आने के बावजूद ग्राम पंचायत और शिक्षा विभाग की चुप्पी बनी हुई है।
7 और 8 जुलाई की बारिश के बाद स्कूल परिसर में पानी भर गया, जिससे कई कक्षाएं जलमग्न हो गईं। नतीजतन, पहली से आठवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई एक ही कमरे में करवाई जा रही है। प्रधानपाठक किरण कुरोठे ने बताया कि बारिश से पहले ही जलभराव की आशंका को लेकर ग्राम पंचायत को सूचित किया गया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और 'स्कूल चले हम' जैसी योजनाएं कागजों पर दम भर रही हैं, जबकि ज़मीनी सच्चाई इसके उलट है। रामाकोना की शासकीय कन्या एवं प्राथमिक शाला बारिश के चलते एक बार फिर जलभराव की चपेट में आ गई है। पिछले 11 दिनों में दो बार मामला सामने आने के बावजूद ग्राम पंचायत और शिक्षा विभाग की चुप्पी बनी हुई है।
7 और 8 जुलाई की बारिश के बाद स्कूल परिसर में पानी भर गया, जिससे कई कक्षाएं जलमग्न हो गईं। नतीजतन, पहली से आठवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई एक ही कमरे में करवाई जा रही है। प्रधानपाठक किरण कुरोठे ने बताया कि बारिश से पहले ही जलभराव की आशंका को लेकर ग्राम पंचायत को सूचित किया गया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।

स्कूल में रह रहे सफाईकर्मी, कक्षाएं कम, पढ़ाई प्रभावित
विद्यालय भवन के दो कमरों में ग्राम के सफाई कर्मचारी और उनके परिजन रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि केवल एक कर्मचारी कार्यरत है, लेकिन दूसरा परिवार भी भवन में रह रहा है और बिजली जैसी सुविधाएं ग्राम पंचायत द्वारा दी जा रही हैं। प्रधानपाठक के अनुसार, कई बार कक्षाएं वापस दिलाने के निवेदन के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला।
घुटनों तक पानी, गिरते बच्चे, नाराज पालक
स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को रोजाना घुटनों तक पानी से गुजरना पड़ता है। कई बच्चे कीचड़ में फिसलकर गिर भी रहे हैं, जिससे पालकों में आक्रोश है। स्थानीय लोग इस स्थिति को शासन की योजनाओं का 'दिखावटी स्वरूप' बताते हैं।
जनप्रतिनिधियों और पंचायत की चुप्पी पर सवाल
ग्रामवासियों का कहना है कि पंचायत और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता अब असहनीय हो गई है। बार-बार सामने आने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। लोगों ने मांग की है कि स्कूल की दुर्दशा पर तत्काल कार्यवाही होनी चाहिए।