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शासकीय अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पूरी: नकुलनाथ

शासकीय अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पूरी: नकुलनाथ
राजनीति
24-Jun-26
छिन्दवाड़ा

जिले के पूर्व सांसद  नकुलनाथ ने शासकीय अस्पतालों को (पीपीपी) मॉडल पर संचालित किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि मप्र की भाजपा सरकार में लड़खड़ाई हुई स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की बजाए उन्हें निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इन हालातों में गुणवत्ता वाले उपचार की उम्मीद कैसे की जाएगी? शासकीय अस्पतालों पर समाज का गरीब, आदिवासी व वंचित वर्ग निर्भर रहता है। बीमार होने पर उसकी एकमात्र उम्मीद शासकीय अस्पताल होती है, लेकिन जब यह आश भी सरकारी स्वार्थ के चलते निजीकरण में तब्दील हो जाएगी तो उसकी उम्मीद भी टूट जाएगी।

पूर्व सांसद नकुलनाथ ने आगे कहा कि मप्र के समस्त जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अत्याधुनिक मशीनें, लैब व पर्याप्त चिकित्सक व नर्सिंग स्टॉफ की तैनाती कर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की बजाए प्रदेश सरकार इन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी संस्थाओं के माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों के लिए टेंडर प्रक्रिया के जरिए निजी संस्थाओं का चयन किया जाएगा, जो डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था संभालेंगी। इससे यह साफ हो रहा है कि सरकार अब स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू ढंग से संचालित करने की स्थिति में नहीं है। वह केवल भाषणों, घोषणाओं और प्रचार के माध्यमों में ही नागरिकों को अच्छा इलाज उपलब्ध करा रही।

रीवा, देवास और गुना में मिली मंजूरी

रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की मंजूरी दी जा चुकी है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है इसके बाद इसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य जिलों के अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को भी निजी संस्थाओं को संचालित करने के लिए सौंपा जाएगा। 

खाली पदों पर नहीं हो रही भर्ती

वर्तमान में सरकारी आंकड़ों के अनुसार मप्र राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग हर चार में से तीन पद खाली है। कुल 5,443 स्वीकृत विशेषज्ञ पदों में से केवल 1,495 पर ही डॉक्टर कार्यरत है, जबकि 3,948 पद खाली पड़े हैं। भाजपा सरकार ने इन पदों को भरे के लिए आज तक कोई ठोस व कारगर कदम नहीं उठाए। कांग्रेस की सरकार के समय निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ही आज भी प्रदेश और देश में सर्वाधिक है। सरकार की नीतियां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की नहीं बल्कि निजी हाथों में सौंपने की है। आज 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, कल इससे अधिक और कुछ दिनों के बाद पूरा स्वास्थ्य महकमा निजी हाथों में होगा।

जनता सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार चाहती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सुविधाओं का विस्तार व डॉक्टरों की भर्ती चाहती है ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही अच्छा इलाज मिल सके। लेकिन सरकार उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर ठेकेदारी सौंपने की तैयारी कर चुकी है।
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