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बारिश के दिनों में सर्पदंश और आकाशीय बिजली से सावधानी के बताये उपाय

बारिश के दिनों में सर्पदंश और आकाशीय बिजली से सावधानी के बताये उपाय
छिंदवाड़ा
16-Jul-25
झिलमिली स्कूल के बच्चों को दी सिविल डिफेंस की ट्रेनिंग

छिंदवाड़ा

ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दिनों में बाढ़, आकाशीय बिजली गिरने और सर्पदंश जैसी घटनाओं में अक्सर जनहानि होती है क्योंकि ग्रामीणों को इससे बचने के उपाए पता नहीं होते हैं। इन प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने झिलमिली के स्कूल बच्चों को बुधवार को न केवल ट्रेनिंग दी बल्कि बचाव के उपाए भी बताए। इस अवसर पर सिविल डिफेंस के मास्टर ट्रेनर श्यामल राव ने बताया कि प्रकृति आधारित आपदाओं से निपटने के लिए शासन अपने स्तर पर कार्य कर रहा पर आपदा के समय सबसे पहले भूमिका समाज में रहने वाले लोगों की होती है। बारिश के दिनों में नदी-नालों में बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है। बाढ़ की स्थिति में इसे पार करना जान जोखिम में डालना होता है। साथ ही ऐसे समय पर बाढ़ से बचने के लिए रस्सी, बांस, ट्यूब, खाली पीपा आदि साथ में रहे तो हम भी बच सकते हैं साथ ही किसी भी डूबते हुए व्यक्ति को भी बचा सकते हैं। 


बाढ़ की स्थिति में नदी के पुल व रपटों को पार न करें और नदियों के तट पर खड़े न रहे क्योंकि बाढ़ के समय नदी का तट खिसलने और जहरीले जीव जंतु भी पानी में बहकर ऊपर आ जाते है जो हमें नुकसान पंहुचा सकते है। वही बरसात के समय बिलों में पानी घुसने से सांप खेत खलियान और घरों के आस पास  होते है जो किसी भी व्यक्ति को नुकसान पंहुचा सकते हैं। इससे बचने के लिए जमीन पर नहीं सोना चाहिए साथ ही दरवाजों की दरारों को बंद रखना चाहिए। घरों के आस-पास सर्पगंधा, तुलसी , शिताब, लेमन ग्रास के पौधे अवश्य लगाये। सांप काटने की स्थिति में यह ध्यान रखे की  काटे हुए स्थल पर गहरा दो घाव  हो तो यह जहरीला सांप है, गोलाकार यानी अनेक हल्के दंत के निशान हो तो हमें समझना है की सांप जहरीला नहीं है। इस स्थिति में हमें प्राथमिक उपचार में काटे हुए स्थान को साबुन से साफ कर तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर एंटीवेनम  का इंजेक्शन लगवाना चाहिए। 

बारिश के समय अक्सर बिजली गिरने की संम्भावना अधिक रहती है इसलिए उस वक्त हमें किसी पेड़ के नीचे  या ऊंचे स्थान पर नही रहना चाहिए और हमेशा चप्पल पहनकर चलना चाहिए। हवलदार अनुदेशक आरपी सिगोतिया ने आपदा के समय उपयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के यंत्रों में बाटल राफ्ट, केन राफ्ट, बॉल राफ्ट,बांस का राफ्ट, रबर ट्यूब, लाईफ जाकेट ,स्टेचर की उपयोगिता  की जानकारी दी। आपदा के समय रखे जाने वाली सावधानी एवं बचाव में किए जाने वाले उपकरणों का रोचक प्रदर्शन एसडीईआरएफ टीम के सुमित शर्मा, स्पर्श यादव, द्वारा कराया गया। 

इसी कड़ी में  एनडीआरएफ से प्रशिक्षण प्राप्त सिविल डिफेंस के  मास्टर ट्रेनर महेश बंदेवार, रीता वर्मा, प्रवीण वर्मा, अर्पित रघुवंशी ने भी उपस्थित छात्रों को भी आपदाओं से बचने के नुख्से बताये। आयोजन को सफल बनाने में झिलमिलि के शिक्षक आरएस डेहरिया, वीके प्रजापति, पी सनोढिया, अम्बर डेहरिया, वर्षा ठाकरे, श्रीमती बिसेन, पी शुक्ला एवं सिहोरा माल के शिक्षक प्रदीप शर्मा, लता कुशराम, योगेश्वरी राहंगडाले, समीक्षा डहरवाल, सरिता शर्मा, का सराहनीय सहयोग रहा।
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