09 ट्रांसमिशन लाइनों में चार वर्षों से बिना ब्रेकडाउन के जारी है बिजली सप्लाई
छिंदवाड़ा
27-Jul-26
छिन्दवाडा

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की छिंदवाड़ा जिला स्थित 09 महत्वपूर्ण एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने विगत चार वर्षों (लगभग 1500 दिन) से बिना किसी ब्रेकडाउन के निर्बाध विद्युत पारेषण कर उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है। आंधी-तूफान, तेज बारिश, आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक चुनौतियों और अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के बावजूद इन लाइनों का सतत एवं विश्वसनीय संचालन जारी है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बांधे तारीफों के पुल
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि छिंदवाड़ा की इन 09 लाइनों सहित प्रदेशभर में एमपी ट्रांसको की कुल 593 ईएचवी ट्रांसमिशन लाइनें भी बीते चार वर्षों से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित होकर प्रदेश की विद्युत पारेषण व्यवस्था की मजबूती और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा अनुरक्षण कार्य में जुटे आउटसोर्स कर्मियों की प्रतिबद्धता, दक्षता और समर्पण का परिणाम है।
ये 09 लाइनें बनीं सफलता की मिसाल
छिंदवाड़ा क्षेत्र की जिन ट्रांसमिशन लाइनों ने यह उपलब्धि हासिल की है उनमें 220 केवी छिंदवाड़ा - बैतूल, 220 केवी छिंदवाड़ा - पांढुर्णा, 220 केवी छिंदवाड़ा - सिवनी पावर ग्रिड के अलावा सन 1976 में ऊर्जीकृत लाइन 132 केवी छिंदवाड़ा - इंटरकनेक्टर (पूर्व में छिंदवाड़ा 132 केवी सिवनी लाइन) के तीन सर्किट, सन् 1980 में निर्मित 132 केवी छिंदवाड़ा- खापास्वामी, 132 केवी छिंदवाड़ा - बिछुआ तथा 132 केवी छिंदवाड़ा लिंगा - रेलवे ट्रैक्शन लाइन शामिल हैं।
आधुनिक तकनीक और सतत निगरानी से बढ़ी नेटवर्क की विश्वसनीयता
ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए थर्माे-विजन निरीक्षण, ड्रोन सर्विलांस, एससीएडीए आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन कंडीशन मॉनिटरिंग तथा समयबद्ध निवारक अनुरक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। नियमित लाइन पेट्रोलिंग, प्री-मानसून मेंटेनेंस, लाइन कॉरिडोर प्रबंधन, पेड़ों की कटाई-छंटाई तथा उपकरणों की सतत निगरानी के माध्यम से संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण किया गया, जिससे ब्रेकडाउन की आशंकाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सका और ट्रांसमिशन लाइनों की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।