पीएमएफएमई योजना से मिली बेकरी उद्योग को नई उड़ान
महिला जगत
21-Sep-26
जामई के सुकरी की श्रीमती रेखा साहू ने लिखी आत्मनिर्भर की नई कहानी

छिन्दवाडा
ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण आधारित सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहित कर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना न केवल उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है, बल्कि युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान कर रही है। जिले में भी इस योजना के माध्यम से कई उद्यमी सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायी कहानी विकासखंड जामई के ग्राम सुकरी की निवासी श्रीमती रेखा साहू की है, जिन्होंने पीएमएफएमई योजना के सहयोग से बेकरी उत्पादन इकाई स्थापित कर स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया और क्षेत्र के कई परिवारों के लिए रोजगार का माध्यम भी बनीं।
श्रीमती रेखा साहू ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ लिया। उनकी बेकरी उत्पादन इकाई के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, जुन्नारदेव शाखा द्वारा 28.50 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया गया। साथ ही योजना के प्रावधानों के अनुसार उन्हें 9.25 लाख रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग ने उनके उद्यम को मजबूती प्रदान की और व्यवसाय को नए स्तर पर स्थापित करने का अवसर दिया। संकल्प हो मजबूत और मिले योजनाओं का साथ,तो आत्मनिर्भरता की मंजिल हो जाती है आसान।
वर्तमान में उनकी एवरीडे बेकरी स्थानीय बाजार में गुणवत्तापूर्ण बेकरी उत्पादों की पहचान बन चुकी है। इकाई में ब्रेड, पाव, टोस्ट, डोनट, क्रीम रोल एवं कुकीज़ सहित विभिन्न उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। बढ़ती मांग के साथ व्यवसाय का विस्तार हुआ और इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के लगभग 20 से 25 परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। इससे न केवल श्रीमती रेखा साहू का परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ, बल्कि कई अन्य परिवारों की आजीविका भी सुदृढ़ हुई है।
एवरीडे बेकरी का मासिक उत्पादन लगभग 9.50 लाख रुपये का है, जबकि मासिक व्यय लगभग 8.45 लाख रुपये रहता है। इस प्रकार श्रीमती रेखा साहू को प्रतिमाह लगभग 1 लाख से 1.25 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। व्यवसाय से होने वाली इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दी है।
श्रीमती रेखा साहू की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने का माध्यम बन रही हैं। पीएमएफएमई योजना आज ऐसे अनेक उद्यमियों के सपनों को नई उड़ान देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी साकार कर रही है।