भगवान राम ने लीला के माध्यम से मनुष्यों को पढ़ाया मर्यादा का पाठ: नागेन्द्र जी
छिंदवाड़ा
30-Mar-26
छिंदवाड़ा
स्थानीय अनगढ़ हनुमान मंदिर में आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन महामंडलेश्वर नागेन्द्र ब्रह्मचारी ने व्यासपीठ से भगवान राम की वन गमन की कथा सुनाई। मनुष्यों को मर्यादा का पाठ पढ़ाने के लिए भगवान राम ने माता कैकई और पिता की आज्ञा लेकर वन की ओर चल दिए। उनके साथ में छोटे भाई लखन और माता जानकी भी राम जी के साथ चल दी।

महामंत्री सुमंत ने राजा दशरथ के आदेशानुसार नगर से बाहर वनों की सीमा के पास उन्हें छोड़कर रथ वापस लेकर चले गए। भगवान राम की वन में उनके बचपन के मित्र निषादराज से भेंट होती है। वे ही उन्हें गंगा तट के पास ले जाते हैं जहां केवट उन्हें गंगा पार कराते हैं। यहां भगवान राम और केवट का संवाद बड़ा ही सुंदर है। इसे हर मनुष्य को समझना चाहिए । केवट जब गंगा पार करा देते हैं और भगवान राम उन्हें उतराई देते हैं तो केवट भगवान से कहते हैं जैसे मैंने गंगा पार कराई वैसे ही आप मुझे भवपार करा देना। ऐसे अनेक गूढ़ रहस्य रामचरित्र मानस के प्रसंग में जिनकी विस्तृत व्याख्या महाराज जी ने बताई। गौरतलब है कि सुबह 9 बजे से पूज्य ब्रह्मचारी जी एवं विद्वानों की उपस्थिति में हनुमान चालीसा,सुंदर कांड,हनुमान अष्टक,बजरंग बाण की चौपाइयां का गायन कर हवन की आहुति कुंड में स्वाहा कर डालीं जा रही हैं कथा में बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी बंधुओं माताओं बहनों की उपस्थिति रही