जानिए होलिका दहन का सही समय, कब मनेगी धुरेंडी
धर्म
28-Feb-26
छिंदवाड़ा
चंद्रग्रहण और भद्रा के कारण इस साल होलिका दहन और धुरेंडी को लेकर बहुत ही भ्रम की स्थिति दिखाई पड़ रही है। कोई 2 मार्च को तो कोई 3 मार्च को होलिका दहन की बात कह रहा है। इसी तरह धुरेंडी को लेकर भी संशय बना हुआ है तो आई प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य द्वारा दी गई जानकारी से जानते हैं होलिका दहन और धुरेंडी कब और किस समय मनाना शुभ होगा।

02 मार्च, सोमवार को कब से कब तक है पूर्णिमा तिथि
पंचांग के अनुसार 2 मार्च, सोमवार को सुबह 06.45 मिनट पर सूर्याेदय होगा एवं सूर्यास्त शाम 06.20 पर होगा/
2 मार्च, सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 05 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी/
2 मार्च को नक्षत्र की बात करें तो सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक आश्लेषा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद मघा नक्षत्र लग जाएगा/
2 मार्च को दिन में दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक अतिगंड योग रहेगा, उसके बाद सुकर्मा योग बनेगा/
अगले दिन यानी 03 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा तिथि शाम 05 बजकर 08 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा के दिन होलिका- दहन किया जाता है। इसके लिए मुख्यतः दो नियम ध्यान में रखने चाहिए-
- 1. पहला, उस समय “भद्रा” न हो। भद्रा का ही एक दूसरा नाम विष्टि करण भी है, जो कि 11 करणों में से एक है। एक करण तिथि के आधे भाग के बराबर होता है। अतिआवश्यक होने पर भद्रा के पूंछ काल में होलिका दहन किया जा सकता है।
- 2. दूसरा, पूर्णिमा प्रदोषकाल- व्यापिनी होनी चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो उस दिन सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तों में पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए। अतः होलिका दहन रात्रि में ही किया जाता है।
होलिका दहन रात में ही क्यों होता है
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन हमेशा रात में और पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है। दिन में होलिका जलाने की परंपरा नहीं है। यही वजह है कि होलिका दहन के लिए रात का समय ही शुभ माना गया है। इस बार पूर्णिमा तिथि 02 मार्च की शाम से शुरू हो रही है, इसलिए होलिका दहन भी 02 मार्च की रात में ही होगा।
भद्रा का साया और दहन का सही समय
इस साल होलिका दहन पर भद्रा का प्रभाव भी है। पंचांग के अनुसार 2 मार्च, सोमवार को शाम 5 बजकर 56 मिनट से लेकर 3 मार्च की सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक भद्रा रहेगी। यानी पूरी रात भद्रा का साया रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा के समय होलिका दहन नहीं किया जाता, लेकिन अगर पूरी रात भद्रा हो तो भद्रा के पुच्छ भाग में दहन करना शुभ माना जाता है। इस साल भद्रा का पुच्छ भाग मध्य रात्रि 01बजकर 26 मिनट से रात 02 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। यही समय होलिका दहन के लिए सबसे अच्छा माना गया है। यानी 02 मार्च की मध्य रात्रि 01.26 से 02.38 के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा। यह करीब 1 घंटा 12 मिनट का समय है।
03 मार्च को चंद्र ग्रहण / 04 मार्च को धुरेंडी
रंग खेलने की परंपरा होलिका दहन के अगले दिन होती है। लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा जिस वजह से सूतक काल मान्य होगा। इस दिन किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। अतः इस बार धुरेंडी (रंग उत्सव) 04 मार्च 2026 बुधवार को मनाया जाना ज्यादा उचित रहेगा।