महाशिवरात्रि महापर्व का जाने शुभ मुहूर्त, ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न
धर्म
13-Feb-26
छिंदवाड़ा
सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (15 फरवरी रविवार) को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन माता पार्वती व भगवान शिव की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत- उपवास रखने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग में मात्र जलाभिषेक करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं और अपने साधकों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

निशिथ काल का समय:-
’ 15-16 फरवरी को निशिथ काल मध्य रात्रि 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 01 बजे तक
प्रथम पहर पूजन का समय:-
’ 15 फरवरी को शाम 6 बजकर 01 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 09 मिनट तक
दूसरा पहर के पूजन का समय:-
’ 15 फरवरी को रात 9 बजकर 09 मिनट से 16 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 17 मिनट तक
तीसरे पहर के पूजन का समय:-
15-16 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 17 मिनट से तड़के सुबह 3 बजकर 25 मिनट तक
चौथे पहर के पूजन का समयः-
16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 25 मिनट से सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का मुहूर्त
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। इस साल महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक सुबह के समय से ही कर सकते हैं और संपूर्ण दिन कर सकते हैं। यदि आप कुछ विशेष मुहूर्त में जलाभिषेक करना चाहते हैं तो निम्न प्रकार कर सकते हैं-
सुबह के शुभ मुहूर्त
चर - सुबह 8.24 - सुबह 9.48
लाभ - सुबह 9.48 - सुबह 11.11
अमृत - सुबह 11.11 - दोपहर 12.35
शाम का शुभ मुहूर्त-
शुभ - शाम 6.11 - रात 7.47
अमृत - शाम 7.47 - रात 9.23
चर - रात 9.23 - रात 10.59
शिव साधना के दिन दुर्लभ संयोग
’ महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है. दरअसल इस दिन शुभ सर्वार्थ सिद्धि योग, व्यतिपात पुण्य काल और वरियान योग का प्रभाव रहेगा|
रुद्राभिषेक में यह वस्तु चढ़ा सकते हैं-
भगवान शिव को जल, गंगाजल, भारतीय देसी गाय का कचा दूध, दही, गौ घृत- घी, शहद, विल्व पत्र, शमी पत्र, चंदन, अक्षत, तिल और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं। ध्यान रहे भगवान के अभिषेक में पवित्र व प्राकृतिक वस्तुएं ही अर्पित करें।
महाशिवरात्रि का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ थी। इसी के कारण इस दिन शिव-पार्वती जी की पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। इसके साथ ही शिव जी का जलाभिषेक करने से वह अति प्रसन्न होते हैं। बता दें कि इस साल शिव योग के साथ शश, मालव्य जैसे राजयोगों का निर्माण हो रहा है।
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप -
महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ मंत्रों का जाप करना चाहिए।
इस दिन महामृत्युंजय या शिव गायत्री मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय या फिर अपने गुरु प्रदत्त मंत्र का जप करना चाहिए।
महाशिवरात्रि में रात्रि जागरण का विशेष महत्व है, अतः रात्रि जागरण करना चाहिए शिव का ध्यान करना चाहिए और भगवान शिव की स्तुति व मंत्रों का जाप करना चाहिए।