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संदेह और सवालों के घेरे में बेदाग छवि

संदेह और सवालों के घेरे में बेदाग छवि
लेख
15-Jun-26
समीक्षक - राम कुमार विश्वकर्मा

राजनीति में बेदाग रहना काफी मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन सा लगता है। पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी तक और भारतीय राजनीति के बड़े-बड़े धुंरधर राजनेताओं ने काफी कोशिश की कि उनका राजनीतिक जीवन बेदाग रहे लेकिन कुछ न कुछ दाग लग ही जाता है जो जीवन में कई बार-बार इतिहास में की गई गलती (जो उनकी नजर में गलती नहीं होती) की याद दिलाता है। 

छिंदवाड़ा की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान विधायक कमलनाथ ने भी जिले में बेदाग छबि बनाने की पुरजोर कोशिश की लेकिन इतिहास बताता है कि उनके राजनीतिक जीवन में भी एक-दो बार दाग लगे जो कभी छूटे नहीं हालांकि समय के साथ उनका रंग फीका जरूर हो गया। एक दशक पूर्व तक विपक्ष के नेता भी श्री नाथ की राजनीति की प्रशंसा करते थे और आज भी जिले की जनता उन्हें बहुत प्यार करती है।

राजनीति में विवादों से जितना हो सके दूर रहने की कोशिशें की जाती है लेकिन कभी-कभी विवाद का केंद्र बिंदु बन जाना नियति बन जाती है ऐसा ही कुछ हुआ है वर्तमान सांसद बंटी विवेक साहू के साथ। विपक्ष लंबे समय से इसी प्रतिक्षा में था कि कहीं कोई ऐसा घटनाक्रम हो जिसमें बेदाग छवि पर कुछ दाग लगे। चारगांव प्रहलाद की घटना में न चाहते हुए भी वर्तमान सांसद विवादों के केंद्र बिंदु बन गए और उनकी छवि पर आखिरकार दाग लग ही गया। सांसद बंटी विवेक साहू द्वारा सार्वजनिक रूप से सफाई भी दी जा रही है लेकिन अंदर ही अंदर सुलग रहा आदिवासियों की जमीन का मुद्दा जनता के सामने आ ही गया। कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इस दाग को लेकर जनता के सामने जाएगी और हर चुनाव में जनता को इस दाग की याद दिलाई जाएगी। 

जिले की राजनीति में आदिवासी वोटर काफी बड़ी संख्या में है जिन्हें नाराज करना किसी भी राजनीतिक दल या नेता के लिए नुकसानदेह है। वर्तमान सांसद बंटी विवेक साहू को मिली जीत में उनके अथक प्रयासों के साथ-साथ आदिवासी नेता विधायक कमलेश शाह और मोनिका बट्टी के समर्थन ने काफी बड़ा सहयोग किया। भविष्य में जिले के कद्दावर आदिवासी नेता जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके, पांढुर्णा विधायक नीलेश उईके और राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा के संस्थापक देवरावन भलावी इस दाग पर लगे रंग को निश्चय ही और गाढ़ा करने का प्रयास करेंगे। यह तो भविष्य बताएगा कि सांसद बंटी विवेक साहू इस दाग के रंग को ईमानदार कोशिशों से कितना फीका कर पाते हैं। 

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