अवैध खनन पर लगेगी रोक, खनिज संसाधनों के विकास को मिलेगी गति: सांसद श्री साहू
राजनीति
13-Aug-26
संसद ने खान और खनिज संशोधन विधेयक-2026 किया पारित
खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और पर्यावरण व श्रमिक सुरक्षा पर जोर

छिंदवाड़ा
सांसद बंटी विवेक साहू ने कहा कि संसद से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 देश के खनिज क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। संशोधन से जहां अवैध खनन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, वहीं खनिज संसाधनों के व्यवस्थित और सुचारू विकास का रास्ता भी साफ होगा। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से खनन कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा पर्यावरण और खनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। सांसद ने बताया कि विधेयक के माध्यम से माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट-1957 में संशोधन किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के खनन को सुगम बनाना है।
एक ही पट्टे में जुड़ सकेंगे अन्य खनिज
साहू ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत खनन पट्टाधारक एक ही पट्टे के अंतर्गत अन्य खनिजों को शामिल करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, निकेल, सोना और चांदी जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को मौजूदा पट्टे में शामिल करने के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त कर, उपकर या लेवी पर भी रोक का प्रावधान किया गया है, ताकि देशभर में खनिजों से संबंधित कर व्यवस्था अधिक एकरूप और स्थिर रहे।
कैप्टिव खानों को अतिरिक्त खनिज बेचने की अनुमति
संशोधन विधेयक में कैप्टिव खानों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सांसद के अनुसार कैप्टिव खदानें अपनी जरूरत पूरी करने के बाद अपने वार्षिक उत्पादन का 50 प्रतिशत तक हिस्सा खुले बाजार में बेच सकेंगी। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए इस सीमा में वृद्धि भी कर सकती है। खुले बाजार में बेचे गए खनिजों पर पट्टाधारक को अतिरिक्त शुल्क देना होगा। राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट के दायरे को भी बढ़ाया गया है। अब ट्रस्ट को खनिज अन्वेषण के साथ खान विकास से संबंधित कार्यों में सहयोग का अधिकार मिलेगा।
नीलामी में देरी पर केंद्र कर सकेगा कार्रवाई
साहू ने बताया कि राज्य सरकारें कोयला, लिग्नाइट और परमाणु खनिजों को छोड़कर अन्य खनिजों से संबंधित कनसेशंस की नीलामी कर सकेंगी। इनमें खनन पट्टे तथा प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस-कम-माइनिंग लीज शामिल हैं। विधेयक केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह राज्य सरकार से परामर्श के बाद नीलामी प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा तय कर सके। यदि निर्धारित अवधि में राज्य सरकार नीलामी पूरी नहीं करती है तो कुछ परिस्थितियों में केंद्र सरकार स्वयं नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगी।
खत्म हो चुकी लीज सरकारी कंपनी को मिल सकेगी
जिन खानों की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, उन्हें कुछ परिस्थितियों में सरकारी कंपनियों को आवंटित करने का प्रावधान भी किया गया है। यह व्यवस्था तब लागू हो सकेगी, जब नई लीज के लिए नीलामी पूरी नहीं हुई हो या नीलामी के एक वर्ष के भीतर नई लीज समाप्त हो गई हो। राज्य सरकार ऐसी खान को सरकारी कंपनी को अधिकतम 10 वर्ष या नए पट्टाधारी के चयन तक, जो भी पहले हो, के लिए दे सकेगी। वहीं सरकारी कंपनियों की खनन लीज की अवधि निर्धारित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहेगा। नीलामी के जरिए दी गई लीज को छोड़कर सरकारी कंपनियों की लीज को निर्धारित अतिरिक्त राशि का भुगतान करने पर बढ़ाया भी जा सकेगा।
रणनीतिक खनिजों के विकास पर फोकस
सांसद बंटी विवेक साहू ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को देखते हुए लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट सहित रणनीतिक खनिजों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। संशोधन विधेयक से इन खनिजों के अन्वेषण और खनन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों का विकास पर्यावरण संरक्षण और श्रमिकों की सुरक्षा के साथ किया जाना आवश्यक है।