गर्मी में लू (तापघात) से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
छिंदवाड़ा
10-Apr-26
छिन्दवाडा
ग्रीष्मकालीन मौसम प्रारंभ होने पर तथा जिले में अधिक गर्मी को दृष्टिगत रखते हुए शुष्क वातावरण में लू (तापघात) की संभावना अधिक होती है तथा इन दिनों में अधिक समय तक बाहर धूप में रहने से व्यक्ति लू (तापघात) का शिकार हो सकते हैं।
बचाव के उपाए
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.नरेश गोन्नाडे ने जानकारी दी है कि आम लोगों द्वारा कुछ तरीके अपनाकर लू (तापघात) से बचाव किया जा सकता है जैसे- गर्मी के दिनों में हमेशा बाहर जाते समय सफेद या हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, भोजन करके और पानी पीकर ही घर से निकलें, गर्दन के पीछले भाग, कान एवं सिर को गमछे या तौलिये से ढककर ही धूप में निकले तथा छतरी और रंगीन चश्मे का उपयोग करें। गर्मी में अधिक मात्रा में पानी पीये तथा ज्यादातर पेय पदार्थाे का सेवन करें तथा बाहर जाते वक्त अपने साथ पानी जरूर रखे, बच्चों, बुजुर्गों एवं गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखे तथा उन्हें बेवजह गर्मी में घर से बाहर नहीं निकलने दें तथा उन्हें समय-समय पर पानी पीने के लिये प्रेरित करें और सुपाच्य भोजन एवं तरल पदार्थों का सेवन करायें। गर्मी के दिनों में तीव्र धूप को अंदर आने से रोके तथा ठण्डे मौसमी फलों का सेवन करे। जहां तक संभव हो, अधिक समय तक धूप में रहकर व्यायाम, मेहनती कार्य न करे, धूप में नंगे पांव ना चले। इन उपायो तथा सावधानियों को अपनाकर स्वयं को लू (तापघात) से सुरक्षित रखा जा सकता।
लू लगने पर क्या करें
लू (तापघात) का शिकार होने पर व्यक्ति में तेज सिर दर्द, मुंह-जुबान सूखने लगती है, माथे, हाथ, पैर से पसीना आना, प्यास लगना, शरीर में पानी की कमी होना, आंखो में जलन एवं पेशाब में जलन होना, गर्म, फफोले, बुखार सिरदर्द, त्वचा में लाल चकते व सूखी त्वचा, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक, मतली या उल्टी, मांसपेशियों में कमजोरी या ऐठन, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, बेचौनी, चक्कर आना, बेहोशी व हल्का सिरदर्द होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
लू (तापघात) पर प्राथमिक उपचार
लू लगने की स्थिति में रोगी को तुरंत छायादार स्थान पर लिटाकर उसके कपड़े ढीले करें और हवा लगाएं। यदि रोगी बेहोश हो तो उसे कुछ भी खाने-पीने को न दें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें। होश में आने पर ठंडे पेय पदार्थ, ओआरएस या कच्चे आम का शर्बत (पना) दिया जा सकता है। ताप कम करने के लिये यदि संभव हो तो उसे ठण्डे पानी से स्नान करायें या उसके शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखकर पूरे शरीर को ढंक दें। यह प्रक्रिया ताप कम होने तक दोहरायें। फफोले होने पर स्टरलाइज ड्रेसिंग कराएं और चिकित्सकीय परामर्श लें। गंभीर स्थिति जैसे तेज नब्ज या बेहोशी होने पर तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को बुलाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएं। सीएमएचओ डॉ.गोन्नाडे ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे गर्मी के मौसम में इन सावधानियों को अपनाकर स्वयं और अपने परिवार को लू (तापघात) से सुरक्षित रखें।