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शहर से लेकर केंद्र तक सरकार, फिर भी ये हाल.....

शहर से लेकर केंद्र तक सरकार, फिर भी ये हाल.....
लेख
30-May-26
समीक्षक: रामकुमार विश्वकर्मा

आज 30 मई 2026 शनिवार का दिन छिंदवाड़ा को एक नया पाठ पढ़ा गया। गुलाबरा क्षेत्र के एक पार्षद जो सत्तासीन पार्टी से हैं, निगम में महापौर भी इन्हीं की पार्टी का है, प्रदेश में सरकार भी इन्हीं की पार्टी की है, इसके अलावा केंद्र में भी सरकार है लेकिन फिर भी निगम से लेकर जिला प्रशासन तक इस जनप्रतिनिधि की कोई सुनवाई नहीं। उनके बारे में कहा तो यह भी जाता है कि वे जब निगम की बैठकों में बोलते हैं तो पूरी नगर निगम हिल जाती है। ऐसे तेजतर्रार पार्षद को कभी अपने वार्ड की जनता का जल संकट दूर करने स्वयं टैंकर से पानी बांटना पड़ता है तो कभी सफाई कर्मी के नहीं आने पर खुद नाले में उतर कर सफाई करना पड़ता है। एक जनप्रतिनिधि की लाचारी ं अखबारों में खबर बन कर छपती हैं तो वहीं सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते हैं या कराए जाते हैं।

घटनाक्रम से आम जनता को सीधा संदेश जा रहा है कि जब सत्तासीन पार्टी के पार्षद की निगम से लेकर प्रशासन तक सुनवाई नहीं हो रही तो आम जनता की क्या सुनवाई होती होगी? हर छोटे-छोटे काम के लिए आम जनता को कितना परेशान होना पड़ रहा होगा। नगर निगम हो, जिला अस्पताल हो, शहर की व्यवस्था हो, यातायात व्यवस्था हो या फिर कोई भी अन्य प्रशासनिक कार्य सब जगह प्रशासनिक अधिकारियों के फैसले जनप्रतिनिधियों पर हावी नजर आ रहे है। जब सबकुछ प्रशासन को ही चलाना है तो जनप्रतिनिधियों की आवश्यकता ही क्या है? और यदि जनप्रतिनिध चुने गए हैं तो इससे आम जनता को क्या फायदा? आम जनता जनप्रतिनिधियों के सामने समस्या लेकर क्यों जाए जब प्रशासनिक अधिकारी उनकी भी नहीं सुनते ?

नगर निगम का ही मामला है जब कुछ महीनों पहले जनप्रतिनिधियों ने बढ़े हुए कर को आधा करने का फैसला लिया जिसे निगम के प्रशासनिक अधिकारियों ने पलट दिया। जनप्रतिनिधि अपना मन मसोसकर रह गए। प्रशासन चलाना यदि प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है तो जनप्रतिनिधियांे का भी जनता के प्रति उत्तरदायित्व है। दोनों के सामंजस्य से आम जनता का भला होगा न कि खींचातानी से। जनप्रतिनिधियों की बातों को इसी तरह अनसुना किया जाएगा तो आम जनता का चुनावों और जनप्रतिनिधियों पर से भरोसा ही उठ जाएगा और यूं ही हर जनप्रतिनिधि को फिर चाहे वह पार्षद हो, विधायक हो या फिर सांसद, जनता की नजर में कर्मठ दिखाई देने के लिए स्वयं मैदान में उतरना पड़ेगा.....।

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