अखंड सौभाग्य के लिए की गणगौर पूजा
धर्म
21-Mar-26
छिंदवाड़ा
हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर पूजा का बेहद मंगलकारी त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्यतः राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़, उत्तर प्रदेश के ब्रज, बुंदेलखंड, गुजरात और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों में मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 21 मार्च शनिवार को आई तो छिंदवाड़ा में रहने वाले परिवारों ने बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ गणगौर पूजन का व्रत किया।

पाटनी टॉकीज के पास निवास करने वाले जाखोटिया परिवार की महिलाओं सुधा जाखोटिया, अलका जाखोटिया, भारती, अंजू, हेतल, मीनू एवं महिमा ने अपने निवास पर गणगौर पूजन किया। श्रीमती सुधा जाखोटिया ने व्रत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति का प्रतीक है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस कठिन व्रत करे रखने से शिव-शक्ति की कृपा मिलती है।
गणगौर का अर्थ
उन्होंने बताया कि गण का मतलब भगवान शंकर और गौर का मतलब माता गौरी यानि पार्वती होता है। यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि देवी पार्वती ने बहुत कठिन तपस्या कर भगवान शिव को पति के रूप में पाया था। हम सभी भगवान शिव और पार्वती की आराधना कर उन्हें प्रसन्न कर अपने लिए अखंड सौभाग्य मांगते हैं। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए इस व्रत को करती हैं।
ऐसे करते हैं पूजा
श्रीमती जाखोटिया ने बताया कि सर्वप्रथम एक वेदी पर शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामाग्री जैसे मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी चढ़ाया जाता है। भगवान शिव को पीले वस्त्र, अक्षत और फूल चढ़ाए जाते हैं। घर में बने पकवान, मिठाई, घेवर और फलों का भोग भगवान को लगा कर गणगौर व्रत की पौराणिक कथा सुनते हैं। अंत में आरती के बाद पूजा में हुई गलती के लिए क्षमायाचना करते हैं।