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जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक खाद में हुआ भ्रष्टाचार: सोनू मागो

जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक खाद में हुआ भ्रष्टाचार: सोनू मागो
राजनीति
19-Jun-26
छिन्दवाड़ा

भाजपा की सरकार में खाद की कालाबाजारी और खाद की हेराफेरी बड़ी मात्रा में हुई है। इसमें सीधे तौर पर भाजपा के नेता शामिल है इसीलिये वे झूठ बोलकर पूरे मामले को दबाना चाहते हैं। करोड़ों रुपयों का खाद नियम विरुद्ध बेचा गया है। मेघदौन और चांद समितियों में हुई हेराफेरी तो मामूली है जिला मुख्यालय पर इससे भी बड़ा गोलमाल हुआ है। मामले की भनक लगते ही एक प्रशासनिक अधिकारी का स्थानांतरण भी किया जा चुका है। किसान जिस खाद को खेत में डालकर फसल उगाता उसे भाजपा नेताओं और भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों ने बेच खाया। दुभार्ग्य देखिए की भाजपा जिला अध्यक्ष भ्रष्टाचार को दबाने के लिए झूठे बयान जारी कर रहे हैं। उक्त उदगार शहर कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनू मागो ने भाजपा जिला अध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए व्यक्त किए।

भाजपा जिलाध्यक्ष की डॉक्टरेट पर उठाए सवाल

श्री मागो ने जारी बयान में आगे कहा कि जिन्होंने कभी पीएचडी के लिए प्रवेश परीक्षा तक नहीं दी, जिन्होंने कभी कॉलेज की दहलीज पर कदम नहीं रखा और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त कर ली। वे यूरिया, डीएपी और एनपीके के अंतर की बात कर रहे, खेत में खड़े होने पर किसान की समस्या समझने का हवाला दे रहे तो वे यह जान लें कि खेती-किसानी और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए खेत में नहीं पहले कॉलेज की दहलीज पर जाना पड़ता है।

कांग्रेस के शासनकाल में नहीं हुआ ऐसा

भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव को स्मरण कराना चाहता हूं कि कांग्रेस के कार्यकाल में छिन्दवाड़ा संसदीय क्षेत्र में किसान कभी खाद के लिए नहीं भटका। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल में छिन्दवाड़ा जिले के 74 हजार 780 किसानों का कर्ज माफ हुआ इसमें भाजपा के किसान नेता भी शामिल है। भाजपा सरकार ने किसानों की कर्जमाफी को भरी सदन में स्वीकार किया है। कांग्रेस और कमलनाथ जी एवं नकुलनाथ जी के कार्यकाल में कभी करोड़ों रुपयों का खाद गायब नहीं हुआ, लेकिन इस वर्ष हुआ है जिसके सारे तथ्य कांग्रेस के पास मौजूद है, लेकिन इसके बाद भी भाजपा जिलाध्यक्ष झूठ बोलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। भाजपा जिला अध्यक्ष से आग्रह है कि झूठे बयान देने की बजाए अवैध तरीके से बेचे गए खाद की निष्पक्ष जांच कराएं, क्योंकि आपकी सरकार में आप यह भी ना करा पाए तो फिर कोरे और खोखले बयानबाजी करने का कोई औचित्य नहीं है। 
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