पर्यूषण महापर्व को लेकर जैन समाज में उत्साह
धर्म
08-Sep-26
श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ में आठ दिनों तक होंगे विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन
आराधक त्रयी के सान्निध्य में होगी विशेष आराधना
छिन्दवाड़ा
जैन धर्म के सर्वाधिक पवित्र एवं आत्मशुद्धि के पर्व पर्यूषण महापर्व का शुभारंभ आज दिनांक 8 सितंबर 2026 से श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ, छिन्दवाड़ा में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ हो गया है। पर्यूषण महापर्व को लेकर संघ के सभी सदस्यों में विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक उमंग का वातावरण है।
इस को विशेष रूप से भक्तिमय एवं ज्ञानवर्धक बनाने के लिए श्री आर्यरक्षित जैन तत्वज्ञान विद्यापीठ मुंबई से नीरवभाई गड़ा, उमंगभाई शाह एवं धैर्यभाई शाह—आराधक त्रयी—छिन्दवाड़ा आ चुके हैं। इनके सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में पर्यूषण महापर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया है ।
तीनों आराधकों की उपस्थिति से इस वर्ष की आराधना में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा एवं उत्साह का संचार शुरू हो गया है।
पर्यूषण महापर्व के आगमन से श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ परिसर में विशेष धार्मिक वातावरण निर्मित हो गया है। समाजजन इस पावन अवसर के प्रथम दिवस की शुरुआत पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ कर दी है। पूजा-अर्चना, स्वाध्याय, प्रवचन, प्रतिक्रमण और क्षमाभाव के माध्यम से आत्मशुद्धि की यह यात्रा संवत्सरी प्रतिक्रमण के साथ अपने भावपूर्ण चरम पर पहुंचेगी।
पर्यूषण महापर्व जैन दर्शन में केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि आत्मावलोकन, संयम, तप, क्षमा, मैत्री और आत्मशुद्धि का महापर्व माना जाता है। इन पवित्र दिनों के दौरान वर्षभर में मन, वचन और काया से जाने-अनजाने हुई भूलों का चिंतन करता है तथा जिन-जिन जीवों अथवा आत्माओं को उसके व्यवहार, वाणी या कर्मों से किसी भी प्रकार का कष्ट पहुंचा हो, उनके प्रति क्षमा याचना करता है। इसी भावना के साथ समाजजन पर्यूषण के इन पावन दिनों में अपनी व्यक्तिगत शिकायतों, मनमुटाव एवं वैमनस्यता को पीछे छोड़कर परस्पर प्रेम, सौहार्द और मैत्री की भावना को मजबूत करने का संकल्प करते हैं।
श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ में आयोजित होने वाले आठ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों में प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल विभिन्न धार्मिक क्रियाओं एवं आराधनाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रक्षाल-अभिषेक, स्नात्र पूजा, धार्मिक व्याख्यान, श्री कल्पसूत्र के प्रवचन एवं वाचन, प्रतिक्रमण, अंगी, भावना तथा बारसा सूत्र के प्रवचन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
पर्यूषण महापर्व के दौरान भगवान महावीर के जन्मोत्सव का विशेष वाचन भी किया जाएगा। इसके साथ ही भगवान महावीर की माता माता त्रिशला द्वारा देखे गए चौदह स्वप्नों का आरोहण कर इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व समाजजनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी एवं बच्चों को जैन धर्म के सिद्धांतों, भगवान महावीर के जीवन एवं उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और करुणा के संदेश को समझने का अवसर मिलेगा।
महापर्व के अंतिम चरण में संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन होगा, जो पर्यूषण पर्व की साधना का सबसे महत्वपूर्ण एवं भावपूर्ण अवसर माना जाता है। संवत्सरी के दिन समाजजन वर्षभर में हुई अपनी भूलों एवं प्रमाद का आत्मचिंतन करते हुए सभी जीवों से क्षमा याचना करेंगे और सभी के प्रति क्षमाभाव धारण करेंगे। “मिच्छामि दुक्कडम्” की भावना के साथ एक-दूसरे से क्षमा मांगना और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखना इस महापर्व की मूल भावना है।
संघ के अध्यक्ष ने बताया कि पर्यूषण महापर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाए और मन, वचन एवं काया की शुद्धि के साथ आत्मा की उन्नति की दिशा में आगे बढ़े। उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे आठों दिनों के धार्मिक कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर आराधना का लाभ लें तथा इस पावन पर्व की मूल भावना को अपने दैनिक जीवन में भी आत्मसात करें।
श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ की ओर से समस्त समाजजनों को पर्यूषण महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कामना की गई है कि यह महापर्व सभी के जीवन में संयम, शांति, मैत्री, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश फैलाए।
आराधक त्रयी के सान्निध्य में होगी विशेष आराधना
छिन्दवाड़ा
जैन धर्म के सर्वाधिक पवित्र एवं आत्मशुद्धि के पर्व पर्यूषण महापर्व का शुभारंभ आज दिनांक 8 सितंबर 2026 से श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ, छिन्दवाड़ा में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ हो गया है। पर्यूषण महापर्व को लेकर संघ के सभी सदस्यों में विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक उमंग का वातावरण है।
इस को विशेष रूप से भक्तिमय एवं ज्ञानवर्धक बनाने के लिए श्री आर्यरक्षित जैन तत्वज्ञान विद्यापीठ मुंबई से नीरवभाई गड़ा, उमंगभाई शाह एवं धैर्यभाई शाह—आराधक त्रयी—छिन्दवाड़ा आ चुके हैं। इनके सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में पर्यूषण महापर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया है ।
तीनों आराधकों की उपस्थिति से इस वर्ष की आराधना में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा एवं उत्साह का संचार शुरू हो गया है।
पर्यूषण महापर्व के आगमन से श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ परिसर में विशेष धार्मिक वातावरण निर्मित हो गया है। समाजजन इस पावन अवसर के प्रथम दिवस की शुरुआत पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ कर दी है। पूजा-अर्चना, स्वाध्याय, प्रवचन, प्रतिक्रमण और क्षमाभाव के माध्यम से आत्मशुद्धि की यह यात्रा संवत्सरी प्रतिक्रमण के साथ अपने भावपूर्ण चरम पर पहुंचेगी।
पर्यूषण महापर्व जैन दर्शन में केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि आत्मावलोकन, संयम, तप, क्षमा, मैत्री और आत्मशुद्धि का महापर्व माना जाता है। इन पवित्र दिनों के दौरान वर्षभर में मन, वचन और काया से जाने-अनजाने हुई भूलों का चिंतन करता है तथा जिन-जिन जीवों अथवा आत्माओं को उसके व्यवहार, वाणी या कर्मों से किसी भी प्रकार का कष्ट पहुंचा हो, उनके प्रति क्षमा याचना करता है। इसी भावना के साथ समाजजन पर्यूषण के इन पावन दिनों में अपनी व्यक्तिगत शिकायतों, मनमुटाव एवं वैमनस्यता को पीछे छोड़कर परस्पर प्रेम, सौहार्द और मैत्री की भावना को मजबूत करने का संकल्प करते हैं।
श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ में आयोजित होने वाले आठ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों में प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल विभिन्न धार्मिक क्रियाओं एवं आराधनाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रक्षाल-अभिषेक, स्नात्र पूजा, धार्मिक व्याख्यान, श्री कल्पसूत्र के प्रवचन एवं वाचन, प्रतिक्रमण, अंगी, भावना तथा बारसा सूत्र के प्रवचन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
पर्यूषण महापर्व के दौरान भगवान महावीर के जन्मोत्सव का विशेष वाचन भी किया जाएगा। इसके साथ ही भगवान महावीर की माता माता त्रिशला द्वारा देखे गए चौदह स्वप्नों का आरोहण कर इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व समाजजनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी एवं बच्चों को जैन धर्म के सिद्धांतों, भगवान महावीर के जीवन एवं उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और करुणा के संदेश को समझने का अवसर मिलेगा।
महापर्व के अंतिम चरण में संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन होगा, जो पर्यूषण पर्व की साधना का सबसे महत्वपूर्ण एवं भावपूर्ण अवसर माना जाता है। संवत्सरी के दिन समाजजन वर्षभर में हुई अपनी भूलों एवं प्रमाद का आत्मचिंतन करते हुए सभी जीवों से क्षमा याचना करेंगे और सभी के प्रति क्षमाभाव धारण करेंगे। “मिच्छामि दुक्कडम्” की भावना के साथ एक-दूसरे से क्षमा मांगना और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखना इस महापर्व की मूल भावना है।
संघ के अध्यक्ष ने बताया कि पर्यूषण महापर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाए और मन, वचन एवं काया की शुद्धि के साथ आत्मा की उन्नति की दिशा में आगे बढ़े। उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे आठों दिनों के धार्मिक कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर आराधना का लाभ लें तथा इस पावन पर्व की मूल भावना को अपने दैनिक जीवन में भी आत्मसात करें।
श्री कच्छी वीसा ओसवाल जैन संघ की ओर से समस्त समाजजनों को पर्यूषण महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कामना की गई है कि यह महापर्व सभी के जीवन में संयम, शांति, मैत्री, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश फैलाए।