प्रशासनिक अधिकारी की बेटी खेती से कमा रही 2 लाख रूपए प्रतिमाह
महिला जगत
06-May-26
छिंदवाड़ा
परासिया विकासखंड के छोटे से ग्राम जाटाछापर की एक महिला किसान ने लीग से हटकर सफलता की ऐसी कहानी लिखी है, जो न केवल खेतों को हरा-भरा कर रही है बल्कि पूरे समाज में जागरूकता और आत्मनिर्भरता का बीज भी बो रही है। यह कहानी है श्रीमती सुषमा शर्मा की, जो एक प्रशासनिक अधिकारी की बेटी हैं, लेकिन उन्होंने सुविधाजनक जीवन को छोड़कर मिट्टी से जुड़ने का निर्णय लिया और आज एक सफल जैविक किसान के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है।
श्रीमती सुषमा शर्मा की यह कहानी बताती है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो सभी बाधाओं को पार करते हुए असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने न केवल खुद को सशक्त बनाया, बल्कि सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। उनकी यह यात्रा सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि बदलाव, साहस और आत्मविश्वास की कहानी है, जो हर महिला के लिए एक प्रेरणा है।
शुरुआत जो बनी बदलाव की नींव - वर्ष 2000 में, जब जैविक खेती का चलन इतना व्यापक नहीं था, श्रीमती सुषमा शर्मा ने कृषि विभाग से प्रशिक्षण लेकर वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरू किया। केंचुआ टांका निर्माण के लिए मिले अनुदान ने उनके इस सफर को मजबूत आधार दिया। एक छोटे से प्रयास ने धीरे-धीरे एक बड़े बदलाव का रूप ले लिया।
महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
आत्मा योजना के अंतर्गत उन्होंने गाँव-गाँव जाकर महिलाओं के समूह बनाए और उन्हें जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह साबित किया कि महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।
एक पशु से 45 पशुओं तक का सफर
श्रीमती सुषमा शर्मा ने जैविक खेती की शुरुआत मात्र एक पशु से की थी। आज उनके पास 45 से अधिक देशी और क्रॉस नस्ल के पशु हैं। दुग्ध उत्पादन उनके व्यवसाय का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।
विदेश से सीखी आधुनिक तकनीक
वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री अध्ययन भ्रमण के तहत जर्मनी और इटली की 12 दिवसीय यात्रा ने उनके दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया। वहां से सीखी आधुनिक पशुपालन और खेती की तकनीकों को उन्होंने अपने खेत में सफलतापूर्वक अपनाया।
पुरस्कारों से सजी उपलब्धियाँ
उनकी मेहनत और लगन को कई मंचों पर सराहा जा चुका है। जिनमें वर्ष 2006 में इंटरनेशनल अवार्ड, पूसा नई दिल्ली, वर्ष 2011 में सर्वाेत्तम किसान पुरस्कार, आत्मा छिंदवाड़ा, वर्ष 2025 ने फार्मर ऑफ द ईयर पुरस्कार, पूसा नई दिल्ली उनकी प्रमुख उपलब्धियां हैं।
खेत से सीधे ग्राहक तक पहुंच
उनकी 2.5 एकड़ जमीन में उगाई गई जैविक सब्जियाँ, दालें और अनाज इतने लोकप्रिय हैं, कि ग्राहक पहले से ही बुकिंग कर लेते हैं। शुद्धता और गुणवत्ता ने उन्हें एक भरोसेमंद ब्रांड बना दिया है। उनके यहाँ का गिर गाय का घी इतना प्रसिद्ध है कि छिंदवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश सिंह भी 2000 रुपये प्रति लीटर की दर से इसे खरीद चुके हैं। जिले के कलेक्टर और अन्य अधिकारी भी उनके उत्पादों की अग्रिम बुकिंग करते हैं।
आय और आत्मनिर्भरता
खेती और दुग्ध उत्पादन से श्रीमती सुषमा शर्मा लगभग 2 लाख रुपये प्रति माह की आय अर्जित कर रही हैं। यह न केवल आर्थिक सफलता है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणा भी है।