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मिट्टी, गोबर, गौ मूत्र और गंगाजल से बनी गणेश मूर्ति का लगा स्टॉल

मिट्टी, गोबर, गौ मूत्र और गंगाजल से बनी गणेश मूर्ति का लगा स्टॉल
छिंदवाड़ा
25-Aug-25
पूर्णतः धार्मिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण को ध्यान में रखकर हुआ निर्माण

छिंदवाड़ा

दो दिन बाद गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना घर-घर और सार्वजनिक पंड़ालों में की जाएगी। इसके लिए मूर्तिकारों ने बड़ी संख्या में मूर्तियों का निर्माण किया है तो वहीं कुछ विक्रेताओं ने अमरावती, नागपुर सहित महाराष्ट्र के अन्य शहरों से मूर्ति बिक्री हेतु लाई है। इन सबके बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी है मिट्टी, गोरब, गौमूत्र और गंगाजल से बनी पूर्णतः धार्मिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई गणेश प्रतिमाएं। इन प्रतिमाओं को विद्वान पंडितों और आचार्यों की पहल, देखरेख और संरक्षण में निर्माण किया गया है। पंडित श्रवण कुमार शास्त्री ने बताया कि सनातन संस्कृति में जो कहा गया है उसी के अनुसार इन प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है। बाजार में जो प्रतिमाएं बिक रही है वे शास़्त्र सम्मत नहीं है। भगवान गणेश जी की शुद्ध पूजा विधि में गोबर गणेश का उल्लेख है इसलिए इन मूर्तियों के निर्माण में मिट्टी के साथ गोबर, गौमूत्र और गंगाजल का उपयोग किया गया है ताकि किसी भी तरह के अशुद्ध पदार्थ  के मिश्रण से बचा जा सके। इसके निर्माण में शुद्ध सात्विक, सनातनी और धार्मिक सोच है न की व्यवसायिक।

क्या है आचार्य और पंडित

प्राकृतिक कृषि और गौ माता सेवा के राष्ट्रीय समन्वयक पंडित राजेश शर्मा, गौ रक्षा संघ के जिलाध्यक्ष और विप्र पुरोहित सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित श्रवण शास्त्री ने बताया कि हमारे धार्मिक आयोजन में श्रद्धा का भाव कम हो गया है और दिखावा ज्यादा होने लगा है इसी बात को ध्यान में रखकर ये पहल की गई है। इस निर्णय सभी पुरोहित कार्य करने वाले पंडितों ने समर्थन किया है जिनमें रामशंकर वाजपेयी, जितेन साहू, आनंद साहू, हरिओम तिवारी, अजय शंकर शर्मा, सत्यम शर्मा, तरूण शर्मा, रामदास भगत राजपूत, देवेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र, यशवंत ठाकरे, अशोक बारपुते आदि शामिल रहे हैं। सभी ने गणेश भक्तों से निवेदन किया है कि गोबर युक्त गणेश का पूजन ही फलदायी है अतः गोबर, मिट्टी से निर्मित गणेश का पूजन करें

कहां मिल रही ये मूर्तियां

प्राकृतिक कृषि और गौ माता सेवा के राष्ट्रीय समन्वयक पंडित राजेश शर्मा, गौ रक्षा संघ के जिलाध्यक्ष और विप्र पुरोहित सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित श्रवण शास्त्री ने बताया कि पुराना पावर हाउस के पास स्टॉल लगाकर इन मूर्तियों की बिक्री की जा रही है। जिन भक्तों को यह मूर्ति स्थापित करनी है वे स्टॉल से खरीद सकते हैं।

बाजार में बिकने वाला पूजा वाला घी वर्जित

पंडित, पुरोहित और आचार्यों ने बताया कि बाजार में पूजा का घी बिकता है दरअसल यह घी नहीं होता यह पशुओं की चर्बी से निर्मित होता है अतः इस तरह के घी का पूजन में उपयोग न करें यह आपकी श्रद्धा और आस्था से खिलवाड़ है। अनजाने में लोग इस अशुद्ध घी का उपयोग पूजा में करने लगे हैं जिसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि घर में दूधमलाई, मक्शन से बने शुद्ध घी से ही दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। यदि बाजार से खरीदना पड़ रहा है तो उसमें शुद्धता की जांच अवश्य करें। विद्वानों ने बताया कि पूजा में अगरबत्ती का उपयोग भी वर्जित है क्योंकि सनातन में बांस का उपयोग जलाने में नहीं किया जाता है और अगरबत्ती में बांस की तीली का उपयोग होता है अतः अगरबत्ती की जगह धूपबत्ती का उपयोग सही है।
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