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कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
धर्म
13-Sep-26
छिंदवाड़ा

हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं। यह व्रत हिंदू धर्म के कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती बिना अन्न और जल ग्रहण किए उपवास रखती हैं.

हरतालिका तीज 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारंभ - 13 सितंबर 2026, सुबह 07.08 बजे

तृतीया तिथि समाप्त - 14 सितंबर 2026, सुबह 07.06 बजे

हरतालिका तीज - सोमवार, 14 सितंबर 2026

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त - सुबह 06.12 बजे से 07.06 बजे तक

प्रदोष काल पूजा - शाम 06.27 बजे के बाद


हरतालिका व्रत पूजन की सामग्री 

1. फुलेरा विशेष प्रकार से फूलों से सजा होता है।
2. गीली काली मिट्टी अथवा बालू रेत।
3. केले का पत्ता।
4. विविध प्रकार के फल एवं फूल पत्ते।
5. बेल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, तुलसी मंजरी।
6. जनेऊ , नाडा, वस्त्र,।
7. माता गौरी के लिए पूरा सुहाग का सामग्री, जिसमे चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, महावर, मेहँदी आदि एकत्र की जाती हैं। इसके अलावा बाजारों में सुहाग पूड़ा मिलता हैं जिसमे सभी सामग्री होती हैं।
8. घी, तेल, दीपक, कपूर, कुमकुम, सिंदूर, अबीर, चन्दन, नारियल, कलश।
9. पञ्चामृत - घी, दही, शक्कर, दूध, शहद।

हरतालिका तीज व्रत और पूजा विधि

व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इस दिन हरे और लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें। पूजा के लिए साफ बालू, रेत या मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाएं। लकड़ी की चौकी पर लाल या हरे रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं स्थापित करें। इसके बाद विधि-विधान से कलश की स्थापना करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म, चंदन और सफेद वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद धूप-बत्ती और अगरबत्ती जलाएं। भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं। हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज की रात भजन-कीर्तन करते हुए जागरण किया जाता है। अगले दिन सुबह पूजा करने के बाद दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण किया जाता है।

हरतालिका व्रत के विशेष सरल उपाय

  • देवी भागवत के अनुसार माता पार्वती का अभिषेक आम अथवा गन्ने के रस से किया जाए तो लक्ष्मी और सरस्वती ऐसे भक्त का घर छोड़कर कभी नहीं जातीं। वहां नित्य ही संपत्ति और विद्या का वास रहता है।
  • शिवपुराण के अनुसार लाल व सफेद आंकड़े के फूल से शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • माता पार्वती को घी का भोग लगाएं तथा उसका दान करें। इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा वह निरोगी होता है।
  • माता पार्वती को शक्कर का भोग लगाकर उसका दान करने से भक्त को दीर्घायु प्राप्त होती है। दूध चढ़ाकर दान करने से सभी प्रकार के दुरूखों से मुक्ति मिलती है। मालपूआ चढ़ाकर दान करने से सभी प्रकार की समस्याएं स्वत ही समाप्त हो जाती है।
  • हरतालिका व्रत के दिन शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को चमेली के फूल चढ़ाने से वाहन सुख मिलता है। अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
  • भगवान शिव की शमी पत्रों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है। बेला के फूल से पूजन करने पर शुभ लक्षणों से युक्त पत्नी मिलती है। धतूरे के पुष्प के पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है। लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
  • भगवान शिव पर ईख (गन्ना) के रस की धारा चढ़ाई जाए तो सभी आनन्दों की प्राप्ति होती है। शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
  • देवी भागवत के अनुसार वेद पाठ के साथ यदि कर्पूर, अगरु (सुगंधित वनस्पति), केसर, कस्तूरी व कमल के जल से माता पार्वती का अभिषेक करने से सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है तथा साधक को थोड़े प्रयासों से ही सफलता मिलती है।
  • जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है। कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नवीन वस्त्रों की प्राप्ति होती है। हरसिंगार के पुष्पों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
  • देवी भागवत के अनुसार माता पार्वती को केले का भोग लगाकर दान करने से परिवार में सुख-शांति रहती है। शहद का भोग लगाकर दान करने से साधक को धन प्राप्ति के योग बनते हैं। गुड़ की वस्तुओं का भोग लगाकर दान करने से दरिद्रता का नाश होता है।
  • भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है। तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
  • द्राक्षा (दाख) के रस से यदि माता पार्वती का अभिषेक किया जाए तो भक्तों पर देवी की कृपा बनी रहती है।
  • शिवपुराण के अनुसार जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है। भगवान शिव को गेंहू चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।
  • देवी भागवत के अनुसार माता पार्वती को नारियल का भोग लगाकर उसका दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। माता को विभिन्न प्रकार के अनाजों का भोग लगाकर गरीबों को दान करने से लोक-परलोक में आनंद व वैभव मिलता है।
  • माता पार्वती का अभिषेक दूध से किया जाए तो व्यक्ति सभी प्रकार की सुख-समृद्धि का स्वामी बनता है।
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