करोड़ों का कारोबार, घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक सजेगा बाजार
धर्म
13-Sep-26
गणेश उत्सव में आस्था और व्यापार का संगम
सार्वजनिक प्रतिमाओं पर 3 करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान
घरों में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं का बाजार 50 लाख से अधिक
समीक्षक: राम कुमार विश्वकर्मा
छिंदवाड़ा
गणेश उत्सव की शुरूआत के साथ ही जिले में धार्मिक आस्था और कारोबार का पहिया भी तेजी से घूमने लगा है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं से लेकर पंडालों की सजावट, डेकोरेशन, पूजन सामग्री, लाइटिंग, फूल-माला और अन्य आवश्यक सामग्री की मांग बढ़ने से बाजार में भी रौनक दिखाई देने लगी है। जिलेभर में इस बार गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमाओं और उत्सव से जुड़ी सामग्री का कारोबार करोड़ों रुपए तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
घरों में विराजमान प्रतिमाएं ही 50 लाख के पार
एक अनुमान के अनुसार जिलेभर में घरों में विराजमान होने वाली भगवान गणेश की प्रतिमाओं की संख्या लगभग 5 हजार के आसपास बताई जा रही है। इन प्रतिमाओं की कीमत आकार, डिजाइन और निर्माण के आधार पर अलग-अलग है। सामान्य रूप से एक प्रतिमा की कीमत करीब 500 से 1 हजार रुपए तक बताई जा रही है।
यदि औसत कीमत के आधार पर अनुमान लगाया जाए तो केवल घरों में स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमाओं का बाजार ही 50 लाख रुपए से अधिक का हो सकता है। हालांकि प्रतिमाओं की वास्तविक संख्या और कीमत में अंतर होने के कारण यह आंकड़ा कम या अधिक भी हो सकता है।
3 करोड़ से अधिक की सार्वजनिक पंडालों में प्रतिमाएं
घर-घर गणेश स्थापना के साथ ही जिलेभर में सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियों द्वारा बड़े स्तर पर पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। जिले में सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमाओं की संख्या करीब 800 से 1 हजार के बीच आंकी जा रही है।
सार्वजनिक पंडालों में स्थापित होने वाली प्रतिमाएं घरों की तुलना में आकार में बड़ी होती हैं और इनके निर्माण पर भी अधिक खर्च आता है। एक सार्वजनिक गणेश प्रतिमा की कीमत लगभग 15 हजार से 40 हजार रुपए तक बताई जा रही है। इस अनुमान के आधार पर सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं का कारोबार जिलेभर में करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का होने का अनुमान है। यदि बड़ी और विशेष डिजाइन वाली प्रतिमाओं की संख्या बढ़ती है तो यह कारोबार और अधिक हो सकता है।
सार्वजनिक पंडालों में 2 से 10 लाख तक खर्च
गणेश उत्सव का बाजार केवल प्रतिमाओं की खरीद तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक पंडालों की तैयारी में प्रतिमा के अलावा पंडाल निर्माण, सजावट, डेकोरेशन, लाइटिंग, इलेक्ट्रिकल सामग्री, कपड़ा, फूल-माला, झालर, साउंड सिस्टम और अन्य सामग्रियों पर भी समितियों द्वारा खर्च किया जाता है। बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक पंडालों में 2 लाख से लेकर 10 लाख रूपए तक का खर्च आता है। इस हिसाब से जिले में भर में सार्वजनिक गणेश पंडालों की संख्या एक हजार से अधिक है तो लगभग 6 करोड़ के आसपास खर्च का अनुमान है।
छोटे से लेकर बड़े पंडालों तक अलग-अलग स्तर पर सजावट की जा रही है। कई समितियां आकर्षक थीम, विद्युत सजावट और विशेष डेकोरेशन पर खर्च कर रही हैं। इससे स्थानीय डेकोरेशन कारोबारियों, टेंट संचालकों, लाइटिंग और साउंड सिस्टम से जुड़े लोगों को भी काम मिल रहा है।
पूजन सामग्री की मांग में भी तेजी
गणेश उत्सव के दौरान पूजन सामग्री की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। गणेश स्थापना के लिए पूजा सामग्री, मोदक, लड्डू, फूल, माला, नारियल, फल, अगरबत्ती, धूप, कपूर, कलश, वस्त्र सहित अन्य सामग्री की मांग बढ़ जाती है।
घर में स्थापना करने वाले परिवारों से लेकर सार्वजनिक गणेश समितियों तक बड़ी मात्रा में पूजन सामग्री की खरीदी की जाती है। ऐसे में किराना, फूल, मिठाई, पूजा सामग्री और अन्य छोटे व्यापारियों के लिए भी गणेश उत्सव महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर लेकर आता है।
छोटे कारोबारियों को भी मिलता है रोजगार
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा निर्माण और बिक्री से जुड़े कारीगरों के अलावा पंडाल बनाने वाले मजदूर, टेंट संचालक, डेकोरेटर, इलेक्ट्रिशियन, साउंड सिस्टम संचालक, फूल विक्रेता, मिठाई दुकानदार और पूजन सामग्री विक्रेताओं को भी अतिरिक्त काम मिलता है। इस तरह गणेश उत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देने वाला बड़ा अवसर बन जाता है।
आस्था के साथ बाजार को भी मिलती है गति
गणेश उत्सव के दौरान जिले के बाजार में बढ़ती गतिविधियां यह बताती हैं कि धार्मिक आयोजनों का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है। गणेश प्रतिमा खरीदने से लेकर पंडाल तैयार करने और पूजा सामग्री की खरीदी तक बड़ी संख्या में छोटे-बड़े कारोबारी इससे जुड़े होते हैं।
यानी भगवान गणेश के स्वागत की तैयारियों के साथ जिले में आस्था के साथ कारोबार का भी उत्सव शुरू हो जाता है। आने वाले दिनों में गणेश प्रतिमाओं की मांग और पंडालों की सजावट का काम बढ़ने के साथ इस कारोबार में और तेजी आने की संभावना है।