जीवन में गुरु के महत्व को समझे और नैतिक मूल्यों को अपनाएं: विनोद तिवारी
छिंदवाड़ा
11-Jul-25
डीडीसी में गुरु-शिष्य परंपरा पर कार्यशाला का आयोजन
छिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार डेनियलसन डिग्री कॉलेज छिंदवाडा में गुरु शिष्य परंपरा विषय पर एनएसएस एवं एनसीसी के संयुक्त तत्वाधान में युवाओं के लिए प्रेरणादाई कार्यशाला का आयोजन किया गया। मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में संस्था की प्राचार्य एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. श्रीमती स्मृति हाबिल द्वारा अतिथि के स्वागत हेतु स्वागत भाषण देते हुए प्राचीन समय में गुरु शिष्य परंपरा की सप्रसंग व्याख्या करते हुए युवाओं को प्रेरक उद्बोधन देकर लाभान्वित किया। कार्यक्रम में एनएसएस के जिला संगठक प्रो रविंद्र नाफड़े एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट माइक प्रकाश एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक विनोद तिवारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एनएसएस के जिला संगठक प्रो. रविंद्र नाफड़े ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता विनोद तिवारी का सम्मान संस्था प्राचार्य श्रीमती स्मृति हाबिल, एनएसएस के जिला संगठक प्रो. रविंद्र नाफड़े, एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट माइक प्रकाश द्वारा तिलक श्रीफल एवं पगड़ी पहनाकर किया गया। उद्बोधन की कड़ी में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विनोद तिवारी द्वारा गुरु शिष्य परंपरा, सनातन संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए उपस्थित जनों को प्रेरित किया कि अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझे और नैतिक मूल्यों को अपनायें। उद्बोधन की अगली कड़ी में प्रो. रविंद्र नाफड़े द्वारा वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को बताते हुए माता-पिता को प्रथम गुरु बताया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. स्वाति जैन, डॉ. रानी साहू, श्रीमती बीना सेन, प्रो. महेश घायवट, प्रो. गणेश सोनी महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं एनएसएस, एनसीसी के कैडेट्स का विशेष योगदान रहा। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता विनोद तिवारी का सम्मान संस्था प्राचार्य श्रीमती स्मृति हाबिल, एनएसएस के जिला संगठक प्रो. रविंद्र नाफड़े, एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट माइक प्रकाश द्वारा तिलक श्रीफल एवं पगड़ी पहनाकर किया गया। उद्बोधन की कड़ी में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विनोद तिवारी द्वारा गुरु शिष्य परंपरा, सनातन संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए उपस्थित जनों को प्रेरित किया कि अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझे और नैतिक मूल्यों को अपनायें। उद्बोधन की अगली कड़ी में प्रो. रविंद्र नाफड़े द्वारा वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को बताते हुए माता-पिता को प्रथम गुरु बताया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. स्वाति जैन, डॉ. रानी साहू, श्रीमती बीना सेन, प्रो. महेश घायवट, प्रो. गणेश सोनी महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं एनएसएस, एनसीसी के कैडेट्स का विशेष योगदान रहा। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।