आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था, इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता : नंदकिशोर शुक्ला
छिंदवाड़ा
25-Jun-26
आपातकाल लोकतंत्र पर लगा अमिट कलंक, देश कभी नहीं भूलेगा* : *विवेक बंटी साहू
आपातकाल सत्ता के अहंकार और लोकतंत्र के दमन का प्रतीक था* : शेषराव यादव
छिंदवाड़ा।
भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की बरसी को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर किए गए प्रहार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन को याद करते हुए लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया गया, साथ ही लोकतंत्र के सेनानी रमेश पोफली, ईश्वरी प्रसाद चौरसिया, अशोक पोपली, ठाकुर दौलत सिंह, मोहन रोडे, मधुकरराव पोफली, राजेंद्र राय, दीनदयाल मोहन, चिवल यादव, आत्माराम, भाग्येश अल्डक को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में आपातकाल के प्रत्यक्षदर्शियों एवं मीसा बंदियों ने उस दौर के अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोपा गया, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरा आघात पहुंचा। इस दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं और हजारों निर्दोष नागरिकों को जेलों में बंद किया गया तथा संवैधानिक अधिकारों का हनन किया गया।
आपातकाल के दौरान जेल में रहे तथा वर्ष 1960 से1988 तक छिंदवाड़ा में प्रचारक के रूप में कार्यरत रहे छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शुक्ला ने उस काले अध्याय की स्मृतियों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा का दौर था, जब केवल राजनीतिक दलों को ही नहीं, बल्कि सामान्य नागरिकों की आवाज को भी दबाने का प्रयास किया गया। हजारों कार्यकर्ताओं को बिना किसी अपराध के जेलों में बंद कर दिया गया और लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल दिया गया। उन्होंने बताया कि जेलों में बंद लोगों ने अनेक कठिनाइयों और यातनाओं का सामना किया, लेकिन लोकतंत्र और राष्ट्रहित के प्रति उनकी आस्था कभी कमजोर नहीं हुई।
श्री शुक्ला ने कहा कि लोकतंत्र केवल संविधान की व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और विश्वास का परिणाम है। यदि नागरिक जागरूक न रहें तो लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयास दोबारा भी हो सकते हैं। इसलिए नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। उनके भावपूर्ण उद्बोधन ने उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया तथा कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर लगा वह कलंक है, जिसने देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को गहरा आघात पहुंचाया। उस दौर में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया, प्रेस की आवाज दबाई गई और राजनीतिक विरोध को कुचलने का प्रयास किया गया। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश पुनः लोकतांत्रिक मार्ग पर लौटा। नई पीढ़ी को आपातकाल की सच्चाई जानना और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कहा कि आपातकाल का दौर सत्ता के अहंकार का प्रतीक था, जब देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया। भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े अनेक कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष किया तथा जेलों में यातनाएं सहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवर्धन के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहे। आज का ‘काला दिवस’ हमें उन संघर्षों और बलिदानों की याद दिलाता है, जिन्होंने लोकतंत्र को जीवित रखने का कार्य किया।
वक्ताओं ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। आने वाली पीढ़ियों को भी उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक स्वतंत्रताओं और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के प्रति समाज सदैव जागरूक और प्रतिबद्ध बना रहे। कार्यक्रम के अंत में लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए लोकतंत्र की मजबूती का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के जिला संयोजक एवं जिला महामंत्री विजय पांडे ने तथा कार्यक्रम के सहसंयोजक धर्मेंद्र मिगलानी ने आभार व्यक्त किया
कार्यक्रम में अमरवाड़ा विधायक कमलेश प्रताप शाह, पूर्व विधायक नत्थनशाह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्रीमती ज्योति डेहरिया, कार्यक्रम सह संयोजक धर्मेंद्र मिगलानी, राजेश बैस, जिला महामंत्री कमलेश उइके, जिला उपाध्यक्ष अजय सक्सेना, जिला उपाध्यक्ष योगेश साहू, बंटी पटेल, जिला मंत्री शैलेंद्र पटेल, श्रीमती नीलू निर्मलकर, जिला कार्यालय मंत्री भारत घई महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती ललिता वर्मा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कांता ठाकुर, पूर्व जिला महामंत्री टीकाराम चंद्रवंशी,पूर्व किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष संजय पटेल, लखन वर्मा, गुरजीत बेदी, दानसिग पटेल, पीयूष बत्रा, सभापति प्रमोद शर्मा, दीपक मिगलानी, धनराज भावरकर, राकेश माइकल पहाड़े,जुगल यादव,सतनाम भट्टी, कमल वाजपेई, कृपाशंकर सूर्यवंशी, कुबेर सिंह सूर्यवंशी, शिव सरसवार, शैलेंद्र मालवी, मातशक्तियों के रूप में श्रीमती माया बंदेवार , श्रीमती अमिता तुलसी बरैया, श्रीमती वंदना विश्वकर्मा, श्रीमती नीलम जंघेला, श्रीमती नीलू छेत्री श्रीमती मनीषा धबाले, लवीना केरकटा, सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।