छिंदवाड़ा में सफाई शुल्क में दस गुना बढ़ोतरी, सुविधाएं शून्य
छिंदवाड़ा
15-Jul-25
पब्लिक संवाददाता- संजय बज
छिंदवाड़ा नगर निगम ने वर्ष 2025-2026 के लिए कचरा शुल्क (सफाई कर) को 120 प्रतिवर्ष से बढ़ाकर सीधे 1200 प्रतिवर्ष कर दिया गया है। यह दस गुना बढ़ोतरी न सिर्फ आश्चर्यजनक है, बल्कि नागरिकों के लिए एक प्रकार का अन्याय भी प्रतीत होती है। विशेषकर तब, जब नगर में सफाई व्यवस्था का हाल बेहद बदतर है।

शहर के अधिकांश मोहल्लों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कचरा संग्रहण के लिए तैनात की गई गाड़ियाँ समय पर नहीं आतीं, और यदि आती भी हैं, तो उनमें कार्यरत कर्मचारी कचरा उठाने की बजाय घरों के मालिकों से स्वयं कचरा डालने को कहते हैं। यही स्थिति व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ भी देखने को मिलती है।
संगीत के माध्यम से लोगों को कचरा गाड़ी के आगमन की सूचना देने की व्यवस्था भी नाममात्र की रह गई है। कचरा वाहन से बजने वाला संगीत इतना धीमा होता है कि नागरिकों को पता ही नहीं चलता कि गाड़ी उनके मोहल्ले में आई भी थी या नहीं।
नगर के सार्वजनिक मैदान, जो बच्चों के खेलने और आमजन के उपयोग के लिए होने चाहिए, अब कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। साफ-सफाई का कोई समुचित तंत्र नज़र नहीं आता। हर गली-मोहल्ले में कचरे की भरमार है, लेकिन उसे उठाने की कोई ठोस और निरंतर व्यवस्था नहीं की गई है।
सड़कों की स्थिति भी बेहद खराब है। जगह-जगह गड्ढे हैं, और कुछ सड़कें तो इस कदर जर्जर हो चुकी हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसी दयनीय स्थिति में नगर निगम द्वारा कचरा शुल्क में दस गुना की वृद्धि किया जाना एक असंवेदनशील निर्णय है। यह आम नागरिक की जेब पर सीधा बोझ डालने जैसा है, बिना उसे मूलभूत सुविधा दिए।
आम जनता के मन में प्रश्न उठता है कि जब सुविधाएं नगण्य हैं, तो शुल्क में यह भारी बढ़ोतरी किस आधार पर की गई है? क्या नगर निगम को नागरिकों की कठिनाइयों की कोई परवाह नहीं? जनता को अब यह जानने और पूछने का पूरा अधिकार है कि आखिर सफाई कर के नाम पर वसूले गए 1200 रुपये प्रति परिवार का व्यावहारिक उपयोग कहां हो रहा है। नगर निगम को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ न केवल शुल्क वृद्धि का कारण बताए, बल्कि तत्काल सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करे, अन्यथा यह आक्रोश एक जन आंदोलन में बदल सकता है।