किसानों को बताए गेंहू की नरवाई जलाने के नुकसान
कृषि जगत
11-Mar-26
छिन्दवाडा
मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् मोहखेड़ के सेक्टर लिंगा के अंतर्गत ग्राम भांडखापा में आज किसानों को गेहूं की नरवाई (फसल अवशेष) नहीं जलाने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान सीएमसीएलडीपी परामर्शदाता श्री कैलाश सोनेवार ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति कम हो जाती है। इससे मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थ (ह्यूमस) नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्म जीव जैसे बैक्टीरिया व केंचुए जलकर खत्म हो जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता घटती है। इसके साथ ही नरवाई जलाने से धुआं और जहरीली गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और वातावरण दूषित होता है।
उन्होंने बताया कि इसका स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे आंखों में जलन, खांसी और श्वास संबंधी बीमारियां बढ़ती हैं, जिसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक पड़ता है। नरवाई जलाने से आगजनी की दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे आग खेतों, पेड़-पौधों और आसपास के घरों तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि होती है, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है तथा जलवायु परिवर्तन पर भी प्रभाव पड़ता है। खेतों के सूक्ष्म जीव, जीव-जंतु और पक्षियों को भी इससे हानि होती है। इसलिए किसानों से अपील की गई कि नरवाई को जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाने के लिए सुपरसीडर या रोटावेटर का उपयोग करें, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत सचिव भवीचन्द्र विश्वकर्मा, शिक्षक संतोष धुर्वे, शिक्षक सुरेन्द्र नवलकर, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति अध्यक्ष दीपक चौरिया, सचिव चंचलेश सोलंकी, सीएमसीएलडीपी के बीएसडब्ल्यू छात्र किसन कुमार मिनोटे सहित ग्रामवासी उपस्थित थे।