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बंद होगी सूत्र सेवा? सीसीटीएसएल से निगम का करार खत्म

बंद होगी सूत्र सेवा? सीसीटीएसएल से निगम का करार खत्म
छिंदवाड़ा
06-Jul-26

शहर की सिटी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को लगेगा बड़ा झटका, ई-बसें बनेंगी विकल्प

जिला स्तर की कनेक्टिविटी, कर्मचारी और विद्यार्थी होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

छिंदवाड़ा

जिले की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बड़ा झटका लगने वाला है। नगर निगम और छिंदवाड़ा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (सीसीटीएसएल) के बीच अनुबंध समाप्त होने के बाद सूत्र सेवा बंद किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। यदि यह निर्णय लागू होता है तो जिले में संचालित 27 बसों का संचालन प्रभावित होगा, जिससे न केवल शहर बल्कि ग्रामीण और अंतरजिला परिवहन व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम और सीसीटीएसएल के बीच अनुबंध अप्रैल 2025 में समाप्त हो गया था। इसके बाद नई व्यवस्था बनने तक बसों का संचालन जारी रखा गया, लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुबंध का नवीनीकरण नहीं हो सका। अब निगम स्तर पर सूत्र सेवा बंद करने की तैयारी अंतिम चरण में बताई जा रही है।

2018 में हुई थी शुरुआत

छिंदवाड़ा में वर्ष 2018 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत सूत्र सेवा शुरू की गई थी। इसके अंतर्गत 27 बसों का संचालन किया जाता है, जो छिंदवाड़ा जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों तक भी यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराती हैं।

इन क्षेत्रों पर पड़ेगा सीधा असर

सूत्र सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर जिले की स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर पड़ेगा।

जिला कनेक्टिविटी प्रभावित होगी 
अमरवाड़ा, सोनपुर, बटकाखापा, सिवनी सहित कई क्षेत्रों की नियमित बस सेवा प्रभावित होगी।

कर्मचारियों को होगी परेशानी
बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारी, विशेषकर शिक्षक, इन बसों से प्रतिदिन अपने कार्यस्थलों तक पहुंचते हैं।

विद्यार्थियों की बढ़ेगी मुश्किल 
ग्रामीण क्षेत्रों से कम किराए में कॉलेज आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह सेवा सबसे सुलभ माध्यम रही है। सेवा बंद होने पर उन्हें अतिरिक्त खर्च और परिवहन संकट का सामना करना पड़ सकता है।

ई-बसों पर रहेगा सरकार का फोकस

प्रदेश सरकार नई परिवहन नीति के तहत ई-बसों के संचालन को बढ़ावा दे रही है। प्रारंभिक चरण में भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों से ई-बसें संचालित किए जाने की योजना है। हालांकि जिला स्तर के रूटों पर ई-बसों के संचालन को लेकर अभी स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। इधर नगर निगम ने इमलीखेड़ा क्षेत्र में ई-बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि लंबी दूरी से आने वाली बसों का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके।

जेसीटीएसएल मॉडल भी चर्चा में

सूत्रों के अनुसार स्थानीय बस सेवा को पूरी तरह बंद करने के बजाय जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (जेसीटीएसएल) के माध्यम से संचालन का विकल्प भी विचाराधीन है। इस व्यवस्था में वर्तमान बस संचालकों के साथ जेसीटीएसएल अनुबंध करेगा और संचालन जारी रखा जाएगा।

किराया बढ़ने की आशंका

यदि बसों का संचालन जेसीटीएसएल के माध्यम से होता है तो यात्रियों पर किराए का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। बस संचालकों का कहना है कि डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के बीच यदि संचालन शुल्क और कमीशन भी जुड़ता है तो किराए में बढ़ोतरी लगभग तय होगी। अनुमान है कि प्रति किलोमीटर 3 से 4 रुपये तक अतिरिक्त लागत जुड़ सकती है।

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