किसानों के पास से मक्का बिकते ही दाम सीधे दोगुना: कांग्रेस
राजनीति
22-Jun-26
मक्का के दामों को लेकर कांग्रेस नेताओ ंने भाजपा सरकार पर बोला जुबानी हमला
छिन्दवाड़ा
किसानों की उपज को उचित मूल्य नहीं मिलना भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों का परिणाम है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण भाजपा सांसद और सभी भाजपाई नेताओं की चुप्पी है। जिनकी जुबान मक्का उपज को उचित मूल्य दिलाने के लिए एक बार भी नहीं खुली। किसान शोर मचाते रहे, लेकिन सत्तापक्ष के नेताओं के मुंह पर लगा ताला नहीं खुल पाया। बड़ी-बड़ी बातें करने वालों से प्रश्न है कि जब मक्का उपज किसानों के पास थी, तब दाम जमीन पर थे। मजबूरी में 14 से 15 सौ रुपए क्विंटल बेचा। आज वही उपज मंडी में 2250 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है। आखिर ऐसा क्यों? क्या सरकार नहीं चाहती की किसान वास्तविकता में सम्पन्न और खुशहाल हो? या भाजपा ने नीति ही ऐसी बना दी है कि जब तक किसानों के पास अनाज रहेगा वह सस्ता रहेगा और बिकते ही दाम लगभग दोगुना हो जाएंगे। उक्त उदगार कांग्रेस के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा।
मनीष पांडेय, जय सक्सेना, संतोष पटेल (विधायक प्रतिनिधि) जीवन सिंह पटेल, अजय सिंह पटेल, मनोज वानखड़े (जिला पंचायत सदस्य) कुलदीप पटेल सुखपाल पटेल सुनील चौधरी,अर्जुन यदुवंशी ने अपनी सयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि, भाजपा सरकार से सीधा प्रश्न है कि,अन्नदाता के हाथों में जब उपज हो तब मंडियों में दाम औने-पौने और बिकने के बाद दोगुना होना यह कैसा गणित है जिसकी गुत्थी आज तक सुलझी नहीं। इसी वर्ष जब किसान के खेतों से मक्का खलिहानों तक पहुंचा तो कृषि उपज मंडी छिन्दवाड़ा में मक्का के दाम 1200-1400 के बीच थे और अब 2200-2300।
अब मंडियों में दाम पहुंचा 2250 रुपए प्रति क्विंटल
छिन्दवाड़ा और पांढुर्ना जिले के सम्पूर्ण किसान अपनी उपज को बेच चुके हैं अब केवल गोदामों में ही मक्का जमा है। मंडियों में प्रति क्विंटल दाम 2250 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच चुका है। इससे यही प्रतीत होता है कि किसान भाइयों के पास अनाज हो तो दाम जमीन पर रखो और जैसे ही बिक जाए तो दाम सीधे दोगुना कर दो। भाजपा की यह नीति अन्नदाता का कितना व कैसे लाभ पहुंचाएगी समझ से बिल्कुल परे है। वर्तमान में जिस दाम पर मंडी में मक्का विक्रय हो रहा है वही दाम अगर किसान भाइयों को मिला होता तो उनकी लागत भी आसानी से निकल जाती। किन्तु हुआ इसके ठीक विपरित जो दाम मिला उससे लाभ तो दूर की बात लागत भी नहीं निकल पाई। इसके बाद भी भाजपा कहेगी वह किसानों की हितैषी है तो उनसे यह सीधा सवाल है कि कैसी हितैषी है जहां खलिहानों में उपज होने पर दाम गिर जाता है और बिकने के बाद आसमान छू जाता है।