प्रदेश में स्नातक बेरोजगारों की संख्या बढ़ना चिंता का विषय: कमलनाथ
राजनीति
21-Jul-26
पूर्व सीएम ने कहा आंकड़ों की बाजीगरी से पैदा नहीं होंगे रोजगार के अवसर
छिन्दवाड़ा
मध्य प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। विगत छह माह के भीतर 1 लाख 12000 नए स्नातक बेरोजगार पंजीकृत हुए हैं। बेरोजगारों की संख्या में यह वृद्धि तब हो रही है जब सरकार ने अपनी तरफ से आंकड़ों की कारीगरी कर बड़ी संख्या में बेरोजगारों को सूची से बाहर कर दिया है। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्नातक बेरोजगारों की संख्या बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को रोजगार के नए क्षेत्र खोजने चाहिए।
बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची
कक्षा बारहवीं पास बेरोजगारों की संख्या में अप्रत्याशित कमी के आंकड़े पूरी तरह संदिग्ध प्रतीत होते हैं। यह आंकड़े मध्य प्रदेश सरकार के निवेश संबंधी आंकड़ों की तरह ही हवा हवाई हैं। मेरा प्रदेश सरकार से सीधा सवाल है कि जब आप हजारों करोड़ रुपए निवेश का दावा करते हैं तो आखिर यह निवेश कहां जा रहा है ? रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय भाजपा सरकार ने बेरोज़गारी शब्द को ही समाप्त करने की कोशिश की। आज बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है और सरकार बेरोजगारी शब्द मिटाकर ही संतुष्ट है जबिक युवा अपने लिए काम मांग रहे हैं।
नए उद्योग और व्यापार के रास्ते लगभग बंद है
भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुके मप्र में अब निवेशक आने से डर रहे हैं, जिसके चलते नए उद्योग और व्यापार के रास्ते लगभग बंद है। जब तक भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगेगी और निवेश की नई नीति तैयार नहीं होगी तब तक बेरोजगारी कम नहीं होगी। इस दिशा में प्रदेश सरकार को ठोस कमद उठाने की आवश्यकता है। निवेश विश्वास से आता है, वादों से नहीं। अगर ईमानदारी और दूरदर्शिता से काम किया जाएगा तो प्रदेश में रोज़गार के अवसर बढ़ाये जा सकते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि विगत छह माह के भीतर स्नातक बेरोजगारों की बढ़ी हुई संख्या के आंकड़ें चिंतित करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में कारगर व ठोस कदम उठाएगी।