कम वर्षा को देखते हुए किसान चना और सरसों की बोनी करें
कृषि जगत
29-Oct-26
कृषि वैज्ञानिक ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत नरवाई प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर दिया जोर
प्राकृतिक खेती एवं फसल विविधीकरण विभाग की प्राथमिकता, परियोजना संचालक आत्मा

छिन्दवाडा अपडेट
कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए आगामी रबी सीजन में किसानों को गेहूं के स्थान पर कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों, विशेषकर चना एवं सरसों की बोनी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस संबंध में कृषि विभाग, आत्मा परियोजना एवं कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त समन्वय से कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव, छिंदवाड़ा में कृषि विस्तार गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी मार्गदर्शन तथा विभागीय योजनाओं के बेहतर समन्वय को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के युवा कृषक शामिल हुए।
बैठक में कम वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चना एवं सरसों का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही किसानों तक उन्नत कृषि तकनीकों की पहुंच सुनिश्चित करने , प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए कृषि विभाग, आत्मा योजना एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा युवा किसानों को प्रेरित किया गया।
चना एवं सरसों की खेती को मिलेगा प्रोत्साहन - कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जीरो टिलेज पद्धति से बोनी करने पर किसानों को नरवाई प्रबंधन में सहायता मिलती है। इसके साथ ही कम लागत में समय पर बोनी होने से कम नमी की स्थिति में भी फसल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है। कम वर्षा की परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
नरवाई प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग आवश्यक
उप संचालक कृषि मोरिस नाथ ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत नरवाई प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। शासन द्वारा 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक खेत बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत नरवाई नहीं जलाने तथा सुपरसीडर, मल्चर, रोटावेटर एवं स्ट्रॉ रीपर के माध्यम से नरवाई का प्रबंधन कर मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिए युवाओं को प्रेरित किया गया।
प्राकृतिक खेती एवं फसल विविधीकरण पर जोर
परियोजना संचालक आत्मा धीरज कुमार ठाकुर ने प्राकृतिक खेती एवं फसल विविधीकरण को विभाग की प्राथमिकता बताया। जिले में प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ाने तथा विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर भी जोर दिया जाएगा।
बैठक में उप संचालक कृषि मोरिस नाथ, परियोजना संचालक आत्मा धीरज कुमार ठाकुर, कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव के वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.के. झाड़े, कृषि विज्ञान केंद्र देलाखारी के वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. डी.के. श्रीवास्तव, डॉ. चंचल भार्गव, डॉ. सरिता सिंह, डॉ. एस.एल. अलावा, एसडीओ कृषि छिंदवाड़ा एन.के. पटवारी, उप परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती प्राची कौतू एवं सुश्री आकांक्षा शिवकर सहित अन्य कृषि वैज्ञानिक और युवा कृषक उपस्थित थे।