गुलाबचंद लोधी ने प्राप्त की डॉक्टरेट की उपाधि
शिक्षा
29-Oct-26
कृषक परिवार से निकलकर शिक्षा, जनजातीय समाज के उत्थान और सामाजिक सरोकारों तक बनाई विशिष्ट पहचान
छिंदवाड़ा अपडेट
शिक्षा, सामाजिक सेवा, जनजातीय लोक संस्कृति के संरक्षण और आधुनिक जैविक कृषि के क्षेत्र में सक्रिय गुलाबचंद लोधी ने अपनी कार्यशैली से समाज में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है। कृषक परिवार में जन्म लेकर उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया तथा विभिन्न संस्थाओं और सामाजिक पहलों के जरिए जनसेवा के कार्यों में योगदान दिया है। हाल ही में शिक्षा विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PHD) की उपाधि प्राप्त करना उनकी शैक्षणिक यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
जनजातीय लोक संस्कृति पर शोध के लिए पीएच.डी. की उपाधि
गुलाबचंद लोधी को उनके शोध ग्रंथ “जनजातीय लोक संस्कृति पर शिक्षा के प्रभाव का समाजशास्त्रीय अध्ययन (मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और बालाघाट के गोंड जनजाति के संबंध में)” के लिए शिक्षा विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई है। उनका शोध मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों के गोंड जनजातीय समाज की लोक संस्कृति तथा शिक्षा के प्रभाव के समाजशास्त्रीय अध्ययन पर केंद्रित है। यह विषय जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, शैक्षणिक परिवर्तन और सामाजिक विकास को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उनकी इस उपलब्धि के पीछे परिवार की शैक्षणिक परंपरा और प्रेरणा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके बड़े भाई डॉ. लक्ष्मीचंद, सेवानिवृत्त प्राचार्य, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, छिंदवाड़ा; डीन, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा तथा क्षेत्रीय निदेशक, मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल, ने वर्ष 1987 में डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। जिनकी प्रेरणा से ही गुलाबचंद लोधी पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर सके हैं।
गुलाबचंद लोधी की शैक्षणिक यात्रा ग्रामीण परिवेश से प्रारंभ हुई। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्राम कोचेवाही, माध्यमिक शिक्षा सुनारकोड़ी, हाई स्कूल की पढ़ाई जगन्नाथ जायसवाल विद्यालय, लांजी तथा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पांढुर्णा, छिंदवाड़ा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा पी.जी. कॉलेज, छिंदवाड़ा से पूर्ण की। उन्होंने एम.एड. की उपाधि अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से प्राप्त की और शिक्षा विषय में पीएच.डी. आईएसबीएम विश्वविद्यालय, कोसमी, रायपुर से हासिल की। शिक्षा के विस्तार और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुलाबचंद लोधी शिक्षा संस्थानों की स्थापना एवं संचालन से जुड़े रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण और जैविक कृषि के प्रति प्रतिबद्धता
पर्यावरण तथा अपनी माटी के प्रति लगाव के चलते गुलाबचंद लोधी ने कृषि क्षेत्र में भी नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र में कालीमाटी, नीमटोला रोड, बिसोनी स्थित श्री अन्नपूर्णा एग्रो फार्म के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां घुइया (अरबी), सुरन यानी जिमीकंद तथा आलू जैसी फसलों के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जाता है। उनका प्रयास है कि कृषि में पर्यावरण के अनुकूल पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाए और किसानों के बीच जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़े।
गुलाबचंद लोधी की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि ग्रामीण परिवेश से जुड़ाव बनाए रखते हुए भी शिक्षा, सामाजिक सेवा, संस्थागत विकास और कृषि नवाचार के माध्यम से व्यापक सामाजिक योगदान दिया जा सकता है। जनजातीय संस्कृति के अध्ययन से लेकर शिक्षा के अवसरों के विस्तार, स्वास्थ्य एवं रक्तदान जागरूकता और जैविक खेती तक उनकी सक्रियता समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।