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भाजपा की नई कार्यकारिणी में संगठन-सत्ता का कैसे होगा संगम?

भाजपा की नई कार्यकारिणी में संगठन-सत्ता का कैसे होगा संगम?
राजनीति
26-Jul-25
वर्तमान में दो धुव्रों में बंटी भाजपा के समन्वय पर संशय?

राम कुमार विश्वकर्मा

छिंदवाड़ा

राजनीति में कब कौन सहयोगी बन जाएगा और कब प्रतिद्वंदी हो जाएगा ये सब परिस्थितियों पर निर्भर करता है। संसदीय चुनाव के पूर्व जो सहयोगी बने हुए थे जाने कब प्रतिद्वंदी बन गए, क्यों और कैसे? भाजपा के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ राजनीति में रूचि रखने वालों के लिए भी यक्ष प्रश्न बन गया। 


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद छिंदवाड़ा भाजपा की नई कार्यकारिणी के समीकरण निःसंदेह तेज हो गए हैं। कौन उपाध्यक्ष बनेगा  और कौन महामंत्री, कौन कोषाध्यक्ष बनेगा और कौन प्रचार मंत्री। इसके अलावा अन्य पदों पर किसका नाम आएगा इसको लेकर भाजपा के संगठन और सत्ता के बीच मंथन तो चल ही रहा है। भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के अलावा राजनीति को दूर से देखने और समझने वाले अन्य संगठनों के साथ-साथ आम जनमानस भी अपना-अपना गुणा-भाग लगा रहे हैं। पार्टी के लिए लंबे समय से समर्पित नेताओं  में कौन ‘बंटेगा’ और कौन रह जाएगा ‘शेष’ यह समय के विवेकाधीन है। क्या फिर कोई ‘विजय’ रण में उतरेगा और समन्व्य के साथ भविष्य की जीत का मार्ग प्रशस्त करेगा? 

अबकी बार कौन होगा जो सत्ता और संगठन का संगम कराएगा। ये संगम होगा भी या नहीं ! इस तरह के अनेकों प्रश्नों पर नेता और कार्यकर्ताओं का मन मंथन चल रहा है। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए नेताओं को कितना महत्व दिया जाएगा यह देखने के लिए भाजपा ही नहीं अपितु कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी उत्सुक है। अध्यक्ष किन्हें क्या पद बांटेंगे और किन्हें ‘शेष’ रखेंगे, जो शेष रह जाएंगे उसके बाद उनका ‘विवेक’ उन्हें किस तरफ ले जाएगा यह आने वाला समय बताएगा। जिले के प्रभारी मंत्री की इसमें क्या भूमिका होगी यह भी देखना होगा। फिलहाल सत्ता और संगठन के बीच समन्वय की पहेली उलझी हुई नजर आ रही है जिसे सुलझाने के लिए  जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक माथापच्ची चल रही है क्योंकि किसी की भोपाल तक पकड़ है तो किसी की दिल्ली तक। कौन झुकेगा, किसका पलड़ा भारी पड़ेगा आने वाले समय में कौन भाजपा की दूसरी पारी का कर्णधार बनेगा यह सब नई कार्यकारिणी से स्पष्ट हो जाएगा।
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