शराब व्यवसायी किसान की पीड़ा और संघर्ष को क्या समझेंगे : संजय पटेल
राजनीति
20-Jun-26
छिंदवाड़ा
किसान नेता संजय पटेल ने कांग्रेस नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनू मांगो के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उनका बयान उनकी राजनीतिक हताशा और खेती-किसानी के प्रति उनकी सीमित समझ को उजागर करता है। किसानों के नाम पर बयान देना आसान है, लेकिन किसान की पीड़ा, उसके संघर्ष और उसके श्रम को समझने के लिए खेत की मिट्टी से जुड़ना पड़ता है। खेती-किसानी खेत में होती है, प्रेस विज्ञप्तियों, राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप में नहीं।
किसान नेता संजय पटेल ने कहा कि कांग्रेस नगर अध्यक्ष को यह समझना चाहिए कि खेती-किसानी कोई शराब व्यवसाय नहीं है, जहां पानी मिलाकर मुनाफा बढ़ा लिया जाए। शराब के कारोबार में मात्रा बढ़ाने और लाभ कमाने की मानसिकता हो सकती है, लेकिन खेती में ऐसा कोई शॉर्टकट नहीं होता। खेती प्रकृति, मौसम, पानी, मिट्टी और किसान के अथक परिश्रम पर आधारित व्यवस्था है।
श्री पटेल ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में किसानों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। उस समय किसानों को कृषि ऋण पर 18 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता था, जिससे अनेक किसान कर्ज के बोझ तले दब जाते थे। भाजपा सरकार बनने के बाद किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के उद्देश्य से अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। आज किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें साहूकारों और महंगे कर्ज से राहत मिली है। सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा, समर्थन मूल्य और किसान कल्याण की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि किसी भी किसान को कर्ज के कारण अपनी जमीन नीलाम होने का भय नहीं रहता और सरकार किसान की सुरक्षा तथा सम्मान के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।
श्री पटेल ने कहा कि यदि खाद वितरण या कृषि व्यवस्था को लेकर कहीं कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन बिना तथ्यों और प्रमाणों के केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए बयान देना किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं है। किसान सब देख रहा है और वह भली-भांति जानता है कि कौन उसके सुख-दुख में उसके साथ खड़ा है और कौन केवल उसके नाम पर राजनीति कर रहा है।