ईश्वर..स्वर्ग..नर्क...और...हम...
लेख
23-Aug-26
लेखक : अनिल ताम्रकार, सेवानिवृत्त शिक्षक
कुछ सवाल हमेशा से ही अनुत्तरित रहे हैं और रहेंगे...!जैसे कि ईश्वर है या नहीं...क्या वाकई स्वर्ग या नर्क जैसा कुछ ष्ऊपरष् होता है या नहीं..क्या सचमुच अमृत जैसा पेय होता है..जिसे पीकर प्राणी अमर हो जाता है...क्या सचमुच कोई पारस जैसी कोई मणि होती है...जिसके स्पर्श से लोहा सोने में बदल जाता है...!लेकिन पौराणिक ग्रंथों में उक्त चीजों के बारे में जो कुछ भी लिखा गया है...उसे हमने सत्य की तरह स्वीकार कर लिया है....इसी प्रकार ईश्वर के विभिन्न रूपों व उसकी अनंत शक्तियों को पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है...वही हमारे जेहन में गहरी पैठ बना चुका है...!कुल मिलाकर हमारी उक्त सभी चीजों पर अंध आस्था व अंधविश्वास ही हमारे लिए सत्य है....! कई बार कई तरह की अलौकिक व चमत्कारिक घटनाएँ इस अंधविश्वास को और अधिक पुष्ट कर देती हैं...!इस रहस्य को आज तक कोई समझ नहीं पाया...!इसी चीज का फायदा धर्म के ठेकेदार और धंधेबाज उठाते हैं..!ऐसे लोगों की सुनामी आ चुकी है...जो लोगों को टोटकों व चमत्कारों की टार्च से अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने के बजाय...अंधभक्ति और अंधविश्वास के गहन अंधकार में धकेल रहे हैं...क्योंकि यही हथियार उनके ष्उद्योगष् का प्रमुख आधार है..!आज से कोई 25 बरस पहले तक देश में कथावाचकों की संख्या सीमित ही थी....लेकिन टी.वी.आने के बाद से क्रमशः इनकी संख्या लगातार बढ़ती रही...और कई ष्धार्मिक चौनलोंष् के आने के बाद तो इनकी बाढ़ आ गई...फिर इसके बादष्सोशल मीडियाष् आने के बाद इनकी ष्सुनामीष् आ गई.....!देश में पिछले चार-पाँच सालों में तो सोशल मीडिया ने कुछ कथावाचक बाबाओं को फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया....अपनी विवादास्पद बातों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई...!अमृत होता है या नहीं...यह तो पता नहीं....लेकिन ष्विषष् का प्रभाव अत्यंत तेजी से फैलता है...यह अकाट्य सत्य है...!रही-सही कसर ।प् ने पूरी कर दी...!जिस देश के लोग जब लिखी हुई बातों को ही सत्य मानकर विश्वास कर लेते हों...वहाँ ।प् से बने वीडियो को ही असली मानने में कोई आश्चर्य नहीं होगा..!मूर्खता की जमीन पर ही अंधभक्ति, अंधविश्वास और पाखंड की फसल लहलहाती है..!
इसी मूर्खता का फायदा नेता और धर्म के ठेकेदार उठाते हैं...! यही मूर्खता मंदिर-मस्जिदों के ष्विकासष् को ष्देश का विकासष् समझ लेती है...!शिक्षा,स्वास्थ्य,बेरोजगारी,देश की सुरक्षा,भ्रष्टाचार,गुंडों का राजनीतिकरण आदि कई गंभीर मुद्दे परिदृश्य से गायब हो जाते हैं..!छद्म राष्ट्रवाद व तथाकथित धर्म की ष्अफीमष् का नशा अत्यंत घातक व विनाशकारी होता है...!इसके सबसे अधिक शिकार वे लोग होते हैं...जो अपनी ष्गरीबीष् दूर करने के लिए ष्चमत्कारष् और ष्टोटकोंष् पर आश्रित होते हैं..!
हमारा देश आज भी सोने की चिड़िया है....लेकिन यह चिड़िया देश के सिर्फ 5ः लोगों के पिंजरे में ही कैद है...! इन 5ः में उद्योगपति,बड़े कारोबारी,अवैध धंधे वाले,धर्म के ठेकेदार बाबा और कथावाचक..बिके हुए अखबारों के मालिक...गोदी मीडिया के लोग...बड़े सेलिब्रिटीज,कलाकार,खिलाड़ी,कवि,लेखक,बिके हुए दलाल पत्तलकार.....आदि हैं..!देेश की जनता को शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा मुहैया करवाना.....जो कि देश की सरकार की ही मुख्य जिम्मेदारी होती है...उसका भी योजनाबद्ध तरीके से निजीकरण करके सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया...!देश में लाखों सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं और बंद होने की कतार में हैं..!देश में शिक्षा और स्वास्थ्य का क्षेत्र माफिया के कब्जे में आ चुका है...!जिन्हें जनता को लूटने की खुली छूट व लायसेंस मिला हुआ है...!जिसमें बुरी तरह पिस रहा है देश का निम्न मध्यमवर्ग व गरीब जनता...!सरकारी स्कूलों व अस्पतालों में असुविधाओं व समस्याओं का अंबार है...!इनके विकास के लिए सरकार का हजारों करोड़ के बजट का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है...!यही हाल सड़कों व पुलों का है....!हजारों करोड़ फूंकने के बावजूद सड़कें व पुल पहली बारिश में ही आत्महत्या कर लेते हैं...दूसरी बारिश देख ही नहीं पाते...!इन हजारों करोड़ों में कितना हिस्सा किन-किन लोगों के हिस्से में जाता है...यह पब्लिक सब जानती है....लेकिन खामोशी से मूकदर्शक बनकर सबकुछ देखते रहती है....!उसे डर है कि कुछ बोलने पर उस पर ष्दिमागी नक्सलष् का ठप्पा लगाया जा सकता है...!
बहरहाल मैंने शुरुआत जिस विषय से की थी...उस पर वापस लौटता हूँ....मैं अनीश्वरवादी या नास्तिक तो नहीं हूँ...लेकिन मेरी ईश्वर संबंधी धारणा भिन्न है....!मैं ष्व्यक्तिगत तौर परष् हमेशा यह महसूस करता हूँ कि इस कायनात में कोई तो ऐसी चीज है...जो हमारे क्रियाकलापों पर सतत् नजर रखती है...जो हमें सत्य की ओर प्रेरित करती है और हमारा सही मार्गदर्शन करती है...और समय-समय पर हमें चेताती भी है...और यह कहीं बाहर नहीं...हमारे भीतर ही है....मेरे लिए शायद यही ईश्वर की कल्पना है...!लेकिन जब बाहर की दुनिया की घटनाओं को देखता हूँ....तो ईश्वर के संबंध में धारणा बदलने सी लगती है....कि इन सब पर उसका नियंत्रण क्यों नहीं है....वह यदि है...तो फिर मूकदर्शक क्यों बना हुआ है...? बस यहीं से मुझे पौराणिक ग्रंथों में वर्णित की गई ईश्वर की अनंत शक्तियों पर से मेरा भरोसा उठ जाता है...!कई बार मुझे यह प्रश्न भी परेशान करता है कि पौराणिक ग्रंथों में जिस ब्रह्मांड और सृष्टि की की बात की गई है...वह क्या सिर्फ हमारे भारत तक ही सीमित है...?क्या दुनिया की महाशक्ति व विकसित माने जाने वाले देश सृष्टि से अलग हैं...?क्या इन देशों में भी धर्म और ईश्वर को उसी रूप में देखा जाता है...जिस तरह हमारे भारत में देखा जाता है...?क्या इन देशों में भी हमारे देश की तरह धर्म के ठेकेदार व धंधेबाज पाए जाते हैं...??इन सवालों के जवाब मैं बरसों से तलाश रहा हूँ...!क्या आपके पास है इन सवालों के जवाब...?यदि हों तो अवश्य बताएँ...!!
नोट: यह लेखक के व्यक्तिगत विचार है।