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कांवड़ यात्रा के जरिए हिंदुत्व की राह पर कांग्रेस: शेषराव यादव

कांवड़ यात्रा के जरिए हिंदुत्व की राह पर कांग्रेस: शेषराव यादव
राजनीति
27-Aug-26
छिंदवाड़ा

कांग्रेस द्वारा कांवड़ यात्रा और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कांग्रेस पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कांग्रेस जिस हिंदुत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से दूरी बनाकर चल रही थी, अब उसी राह पर कदम बढ़ाना सकारात्मक बदलाव है। उन्होंने कांग्रेस को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि “आखिरकार कांग्रेस की घर वापसी हुई है।”

भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कहा कि एक ओर छिंदवाड़ा कांग्रेस कांवड़ यात्रा निकालकर भगवान शिव की आराधना और सनातन परंपराओं से जुड़ रही है, वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी लगातार हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर विरोध और विवादित टिप्पणियां करते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छिंदवाड़ा कांग्रेस ने कांवड़ यात्रा निकालकर राहुल गांधी को सत्य सनातन धर्म को अपनाने का संदेश दिया है? क्या यह कांग्रेस की विचारधारा में बदलाव और सनातन के प्रति सम्मान की नई शुरुआत है?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस वास्तव में सनातन धर्म को अपनाए और उसका सम्मान करे, केवल वोट के लिए दिखावा न करे। धार्मिक आस्था और सनातन परंपराएं किसी चुनावी लाभ का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। यदि कांग्रेस ने वास्तव में अपनी सोच बदली है तो उसे यह बदलाव अपने आचरण और विचारों में भी दिखाई देना चाहिए।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि “हम कांग्रेस के इस बदले हुए अंदाज का स्वागत करते हैं। यदि कांग्रेस वास्तव में सनातन, धार्मिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति के साथ खड़ी होना चाहती है, तो यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है। आखिरकार कांग्रेस की घर वापसी हुई है।”

उन्होंने कहा कि अब छिंदवाड़ा कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कांवड़ यात्रा के माध्यम से वह राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को क्या संदेश देना चाहती है। यदि यह सनातन की स्वीकार्यता है तो इसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन यह केवल राजनीतिक या चुनावी लाभ के लिए किया गया आयोजन नहीं होना चाहिए। भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कहा कि “कांग्रेस सनातन को दिल से अपनाए, सनातन परंपराओं का सम्मान करे और देश की आस्था के साथ खड़ी हो। जनता सब समझती है, इसलिए सनातन के नाम पर दिखावा नहीं, बल्कि वास्तविक सम्मान और स्वीकार्यता दिखाई देनी चाहिए।”
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