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58 प्रतिशत लोगों ने माना ‘शहर की सफाई व्यवस्था खराब’

58 प्रतिशत लोगों ने माना ‘शहर की सफाई व्यवस्था खराब’
छिंदवाड़ा
10-Feb-26
छिंदवाड़ा अपडेट ‘जनमत’ में लोगों ने दिखाया नगर निगम को आईना

छिंदवाड़ा

नगर पालिक निगम शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे करें लेकिन हकीकत कुछ और ही बंया हो रही है। स्वयं शहरवासियों ने सर्वे में माना है कि वे शहरी सफाई व्यवस्था से बिलकुल भी संतुष्ट नहीं है। छिंदवाड़ा अपडेट के ‘जनमत’ में हमने इस बार विषय रखा था कि ‘नगर पालिक निगम छिंदवाड़ा की शहरी सफाई व्यवस्था के बारे में आप क्या सोचते हैं! इस अभियान को हमने लगभग 15 दिनों तक चलाया ताकि अधिक से अधिक लोग अपना मत दे सके। 15 दिनों बाद इसके परिणाम आए तो वह बहुत ही चौंकाने वाले थे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि शहरी सफाई व्यवस्था इतनी खराब है। 

हमने अपने सर्वे में चार विकल्प दिए थे जिसमेंः-
  • बहुत अच्छी है : 5 प्रतिशत
  • बिलकुल खराब है : 58 प्रतिशत
  • ठीक है : 29.8 प्रतिशत
  • कुछ कह नहीं सकते : 7.2 प्रतिशत

इन विकल्पों को प्राप्त मत से स्पष्ट है कि शहरवासी सफाई व्यवस्था को खराब मान रहे हैं। छिंदवाड़ा अपडेट के सर्वे से यह तो स्पष्ट हो गया है कि शहर की सफाई व्यवस्था को नंबर 1 पर लाने के लिए करोड़ों रूपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। 

जब शहरवासी ही संतुष्ट नहीं तो केंद्र की सर्वे टीम कैसे बनाएगी नंबर 1

छिंदवाड़ा नगर पालिक निगम का गठन हुए लगभग 12 वर्ष हो रहे है लेकिन नगर निगम के बाद शहर का जैसा विकास होना चाहिए था वैसा विकास नहीं हो पाया है खासकर स्वच्छता के मामले में। शहर की सफाई व्यवस्था से जब शहरवासी ही संतुष्ट नहीं है तो केंद्र की टीम को सफाई के लिए कैसे संतुष्ट कर पाएगी। 

स्वच्छता कर में बढ़ोतरी से भी नाराजगी

पिछले 12 वर्षों में डोर टू डोर कचरा इकट्ठा करने के अलावा कोई खास उपलब्धि नगर निगम के खाते में नहीं आई है बल्कि कचरा संग्रहण के लिए नगर निगम द्वारा जो कर वसूला जा रहा है उससे भी जनता नाराज है। इतना अधिक स्वच्छता कर वसूलने के बाद भी सफाई व्यवस्था से शहरवासी संतुष्ट नहीं तो लगता है नगर निगम को नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो कि अगले चुनाव में यह प्रमुख मुद्दा बन जाए और नगर सरकार ही बदल जाए।
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