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वसुधैव कुटुम्बकम् की विचारधारा से ही विश्व में शांति हो सकती है - पांडेय

वसुधैव कुटुम्बकम् की विचारधारा से ही  विश्व में शांति हो सकती है - पांडेय
छिंदवाड़ा
31-Aug-25
छिंदवाड़ा

  उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार परासिया रोड स्थित इंदिरा  प्रियदर्शिनी महाविद्यालय में ,भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ  के द्वारा प्राचार्य डॉ जैमिनी खानवे के  मार्गदर्शन में  कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
 इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद, छिन्दवाड़ा ईकाई  के वरिष्ठ साहित्यकार रमाकांत पांडे ने  वसुधैव कुटुम्बकम् पर अपना व्याख्यान दिया ।

उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि  संपूर्ण विश्व  एक परिवार है,  विश्व में अनेकों भाषाएं बोली जाती है रंग रूप आकार एवं विचारधाराओं में भेद जरूर हो सकता है परंतु हम सभी मानव रूप मैं एक परिवार का हिस्सा है और अगर इस विचारधारा के साथ संपूर्ण विश्व  आपस में मिलकर रहने लगे तो कभी भी विश्व में युद्ध की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी । वर्तमान में विभिन्न देशों के मध्य निरंतर युद्ध की स्थिति बनी है अथवा तो कई देशों के मध्य युद्ध चल रहा है ऐसी स्थिति में वसुधैव कुटुम्बकम् की विचारधारा ही  विश्व मे  शांति  लाने का एक माध्यम है।

 इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद के सदस्य महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी रितेश मालवीय के द्वारा किया गया । कार्यक्रम के अंत में मानव मानव एक समान का  नारा लगाया गया ।
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