पीपीएच कैन्युला तकनीक से बचीं दो माताओं की जान
स्वास्थ्य
02-Aug-26
चिकित्सकों की तत्परता से गंभीर रक्तस्राव पर पाया गया नियंत्रण

छिंदवाड़ा
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की सूझबूझ और आधुनिक पीपीएच (पोस्ट पार्टम हेमरेज) कैन्युला तकनीक के सफल उपयोग से अत्यधिक रक्तस्राव से जूझ रही दो महिलाओं की जान बचा ली गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपी महाजन और उनकी टीम ने समय पर निर्णय लेते हुए दोनों मरीजों का सफल उपचार किया, जिससे उन्हें बड़े ऑपरेशन और गर्भाशय निकालने जैसी जटिल सर्जरी से भी बचाया जा सका।
पहले मामले में श्रीमती चांदनी भूपेंद्र वर्मा का गर्भस्थ शिशु संकट में होने के कारण आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद गर्भाशय का संकुचन नहीं होने से उन्हें एटोनिक पीपीएच की गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा और अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। दवाओं और सामान्य उपचार से राहत नहीं मिलने पर चिकित्सकों ने पीपीएच कैन्युला तकनीक अपनाई। गर्भाशय में वैक्यूम प्रेशर बनने के बाद संकुचन सामान्य हुआ और रक्तस्राव पूरी तरह रुक गया।
दूसरे मामले में श्रीमती भावना दीपक कराडे अधूरे गर्भपात के बाद गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचीं। प्लेसेंटा निकालने के बाद भी लगातार रक्तस्राव जारी रहा। सभी उपचार विफल होने पर सर्जरी की तैयारी की जा रही थी, तभी अंतिम विकल्प के रूप में पीपीएच कैन्युला तकनीक का उपयोग किया गया। महज 15 मिनट में रक्तस्राव नियंत्रित हो गया और आवश्यक रक्त चढ़ाकर मरीज को पूरी तरह स्थिर कर दिया गया।
दोनों मामलों की सफलता ने साबित किया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक, प्रशिक्षित चिकित्सकीय दल और समय पर लिया गया निर्णय गंभीर परिस्थितियों में भी जीवन बचाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो सकता है। जिला चिकित्सालय की यह उपलब्धि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।