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पाखंड और अंधविश्वास से परे ईश्वरीय अस्तित्व

पाखंड और अंधविश्वास से परे ईश्वरीय अस्तित्व
लेख
11-Sep-26
लेखक: अनिल ताम्रकार (सेवानिवृत्त शिक्षक)

पाखंडी और अंधविश्वास फैलाने वालों का विरोध तो उचित है....लेकिन अपने पूर्वाग्रहों व धारणाओं के प्रति अंधविश्वासी होना भी ठीक नहीं...ईश्वर के होने या न होने में वैचारिक भेद हो सकता है...लेकिन हर घटना को पाखंड व अंधविश्वास के चश्में से देखना भी ठीक नहीं.....जब तक मनुष्य पूर्णतः भरोसे के काबिल नहीं होगा...तब तक ईश्वर की प्रासंगिकता व उपयोगिता बनी रहेगी.....छल कपट और धोखे से भरी इस दुनिया में इंसान को एक ऐसे सहारे की जरूरत होती है...जहाँ यह सब न हो....और उसकी यही तलाश ईश्वर पर आकर ही खत्म होती है.....!अब ईश्वर के अस्तित्व को नकारने वालों के मन में यह सवाल उठना भी लाजिमी है...कि यदि ईश्वर है...तो फिर उसके रहते हुए उसकी नाक के नीचे ही दुनियाभर के पाप व अत्याचार क्यों हो रहे हैं...वह सर्वशक्तिमान होते हुए भी मूकदर्शक की भांति क्यों सबकुछ देख रहा है..?वह अपनी शक्ति का उपयोग इस धरती को पाप और पापियों से मुक्त करने के लिए क्यों नहीं करता...?यदि आप ऐसा सोचते हैं...तो इसका मतलब यह हुआ कि ईश्वर की जिन छवियों,जिन स्वरूपों का ,जिन अपार शक्तियों का धर्मग्रंथों में उल्लेख व चित्रण किया गया है...आपके लिए ईश्वर की वही अंतिम धारणा है...!

आप सोचते हैं कि कोई चार या दस हाथ वाला ईश्वर या देवी नंदी,गरुड़,भैंसे,शेर पर सवार होकर आएगा और इस धरती से कलयुगी रावणों,कंसों,महिषासुरों,रक्तबीजों,हिरण्याक्षों,दुर्याेधनों आदि आदि का संहार कर देगा...जैसा कि धर्मग्रंथों में बताया गया है....तो फिर आपकी ईश्वर के प्रति धारणा के संबंध में मुझे कुछ नहीं कहना..कुछ भी नहीं....!यदि हर युग में सबकुछ ईश्वर को ही करना है...तो फिर उसने मनुष्य बनाया ही किसलिए..वह किस खेत की मूली है.....?क्या सिर्फ हर पाप व अत्याचार के सामने हथियार डालने के लिए...?क्या इस धरती से पाप और अत्याचार मिटाने के लिए वह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा...और उम्मीद करेगा कि यह सब तो ईश्वर की ही जिम्मेदारी है...सब उसे ही करना चाहिए...?हम तो बस ईश्वर से हमेशा भीख ही मांगते रहेंगे...अपनी सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य के लिए....?इस दुनिया को हम सब मिलकर नर्क बनाते रहेंगे....और फिर उम्मीद करेंगे कि वही ईश्वर यहाँ आकर इस नर्क को स्वर्ग बनाएगा...?हम जिनकी पूजा करते हैं....उन पर ही अत्याचार करते रहेंगे....!नदियों,पहाड़ों,वृक्षों व प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करते रहेंगे...और फिर उन्हें पूजने का पाखंड भी रचते रहेंगे...!जो असली है....उसे छोड़कर नकली भगवानों की पूजा करते रहेंगे..... और तो और...जिस ईश्वर से हम सारी उम्मीद और भरोसा लगाकर बैठे हुए हैं....उसीके साथ छल,कपट करते रहेंगे और उसे ही धोखा देते रहेंगे...! दान-धरम की सफेद चादर में अपनी काली करतूतें छुपाते रहेंगे...!धार्मिक होने का दावा करेंगे और अधर्म में आकंठ डूबे रहेंगे...!क्योंकि अब ईश्वर ऊपर से आकर तो देख नहीं सकता...वह आपको दुनिया के सामने छली,कपटी,पाखंडी और धूर्त तो साबित कर नहीं सकता...ना ही इसका कोई प्रमाण दे सकता...!हम अपने अधिकारों के प्रति तो सदैव जागरूक रहते हैं..लेकिन कर्तव्यों के प्रति बिल्कुल भी नहीं...!यह कैसी धार्मिकता है...??

ईश्वर,अल्लाह या गॉड....आप जो भी उसे नाम दें....वह हर शय में है...उसे सिर्फ मंदिरों,मस्जिदों,गिरजाघरों व गुरुद्वारों में ही कैद नहीं किया जा सकता...वह वहाँ भी है....जहाँ चोरी करते हुए,अपनों के साथ छल करते हुए, धोखा देते हुए या बेईमानी करते हुए...या अन्य अपराध करते हुए आपको कोई नहीं देख रहा है...!आपको आपके अलावा सिर्फ वह ईश्वर ही सही सही पहचानता है....कि वास्तव में आप कितने गहरे पानी में हैं...कितने सच्चे,कितने झूठे या कितने धूर्त हैं...बाकी कोई नहीं....!हाँ....लेकिन जिस काम के लिए उसने आपको इस धरती पर भेजा है....उसे ईमानदारी से पूरा करना ही सच्ची भक्ति है...बाकी सब ढोंग है...!यदि आप एक सच्चे मनुष्य नहीं हैं...तो फिर आपका कुछ भी होना निरर्थक व मूल्यहीन ही है...!

मैंने पहले भी कहा है कि कुछ अनुभव व घटनाएँ ऐसी होती हैं....जिनका कोई ऐसा ठोस प्रमाण नहीं दिया जा सकता...जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले स्वीकार कर सकें.....इंसान दूसरे इंसान को तो कभी ठीक से पहचान नहीं पाता.....तो वह ईश्वर को कैसे पहचान  सकता है.....?उस ईश्वर को....जो हर जगह मौजूद है....मनुष्य के ही अंदर भगवान और शैतान दोनों हैं....

सच्चे,सरल,निश्छल,निष्कपट,ईमानदार इंसान के अंदर ईश्वर सक्रिय रहता है...(भले ही वह नास्तिक हो)....और झूठे,कपटी,बेईमान के अंदर शैतान सक्रिय रहता है...(भले ही वह आस्तिक हो).....मैंने पहले भी कई धार्मिक फिल्में व धारावाहिक देखे हैं....लेकिन हनुमान अंश देखने का अनुभव कुछ हटकर हुआ...बाबा के सुने-सुनाए चमत्कारों पर आप भले ही यकीन न करें...लेकिन जिस फिल्म में कोई प्रसिद्ध या बड़ा कलाकार, संगीतकार, गीतकार, निर्देशक,गायक नहीं....जिसकी लागत दो करोड़ से कम....जो शुरु में सिर्फ 40 स्क्रीन पर ही रिलीज की गई...जिसके निर्माता के पास प्रमोशन तक के पैसे नहीं थे...जो शुरू के दो हफ्तों तक फ्लॉप रही...और फिर अचानक ऐसा क्या घटित हुआ...कि अगले दो हफ्तों में फिल्म लागत से 50 गुना से भी अधिक कमाई करके सारे रिकार्ड ध्वस्त कर देती है...?कुछ सवाल रहस्य बने रहें तो ही ठीक है....!

नोट: यह लेखक के व्यक्तिगत विचार है।
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