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विद्यार्थियों से नवाचार अपनाने और रोजगार सृजक बनने किया आह्वान

विद्यार्थियों से नवाचार अपनाने और रोजगार सृजक बनने किया आह्वान
शिक्षा
09-Oct-26

दो दिवसीय “इनक्यूबेशन, स्टार्टअप एवं एंटरप्रेन्योरशिप” कार्यशाला आयोजित


छिंदवाड़ा अपडेट

आज के युवाओं में प्रतिभा, तकनीकी कौशल और नए विचारों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि वे अपनी रुचि एवं क्षमता को पहचानें, समाज की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए नवाचारपूर्ण पहल करें। युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहकर रोजगार सृजित करने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ एवं मणिपुर की पूर्व राज्यपाल माननीय सुश्री अनुसुईया उइके ने यह बात इंदिरा गांधी शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय “इनक्यूबेशन, स्टार्टअप एवं एंटरप्रेन्योरशिप” कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कहे।

इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की सोच विकसित करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें स्वरोजगार एवं रोजगार सृजन के अवसरों से परिचित कराना है। सुश्री अनसूया उइके की सुदीर्घ सामाजिक सेवा के लिए उनका शाल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मान प्राचार्य द्वारा किया गया।  महाविद्यालय के प्राचार्य ने कार्यशाला को विद्यार्थियों के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी दक्षता और नवाचार के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान करने तथा नए अवसर विकसित करने के लिए सक्षम बनाना भी है।

कार्यशाला के प्रथम दिवस के प्रमुख वक्ता प्रोफेसर मनोहर सिंह तथा मनोज सोनी रहे। दोनों वक्ताओं ने क्रमशः स्टार्टअप एवं समस्या समाधान के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि सफल उद्यम की शुरुआत किसी समस्या की पहचान और उसके व्यावहारिक समाधान की खोज से होती है।

वक्ताओं ने छोटे-छोटे व्यावहारिक टूल्स एवं गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की रुचियों, क्षमताओं और विचारों को पहचानने का प्रयास किया। विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुरूप नए विचार विकसित करने, उनकी उपयोगिता समझने तथा उन्हें व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचारी सोच विकसित करना और उनके विचारों को वास्तविक परियोजना अथवा व्यवसाय का रूप देने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यशाला में बिजनेस आइडिया विकसित करने, स्थानीय समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजने, व्यवसाय मॉडल तैयार करने तथा उद्यमिता की संभावनाओं को समझने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि तकनीकी कौशल और रचनात्मक सोच के समन्वय से वे न केवल अपने लिए रोजगार के अवसर बना सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नीलम खासकलम ने किया। कार्यशाला की कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती नीलम खासकलम तथा सह-समन्वयक राकेश कावरे हैं। आयोजन में स्टाफ सदस्यों शाइस्ता मंसूरी, ओम कटकवार, स्वाति चौरसिया, ममता बघेल, आकांक्षा बुनकर, राधेश्याम सनोदिया एवं अर्चना तिवारी का सहयोग रहा। अंत में श्री राकेश कावरे ने आभार प्रदर्शन किया। दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देने, नवाचार की संभावनाएँ तलाशने तथा भविष्य में सफल उद्यमी बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
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