27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर एकजुट हुए सामाजिक एवं जातीय संगठन
छिंदवाड़ा
11-Oct-26
छिंदवाड़ा अपडेट

मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद पिछड़ा वर्ग के सामाजिक एवं जातीय संगठनों ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में छिंदवाड़ा स्थित महाजन लॉन में ओबीसी समाज के विभिन्न सामाजिक और जातीय संगठनों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ओबीसी आरक्षण, सामाजिक न्याय, शिक्षा एवं शासकीय सेवाओं में पिछड़ा वर्ग के उचित प्रतिनिधित्व तथा आगामी कानूनी और लोकतांत्रिक रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने एक स्वर में पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विषय केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों युवाओं के शैक्षणिक अवसरों, रोजगार में भागीदारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण प्रश्न है।
बैठक के दौरान न्यायालय के निर्णय का गहन अध्ययन करने, प्रासंगिक तथ्यों एवं आंकड़ों का संकलन करने, विधि विशेषज्ञों से परामर्श लेने तथा आवश्यकता पड़ने पर सर्वाेच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई जारी रखने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछड़ा वर्ग को न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ शासकीय सेवाओं में उनके प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रासंगिक तथ्यों का समुचित परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान संगठनों के प्रतिनिधियों ने राज्य शासन की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों, आंकड़ों और कानूनी पक्ष की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर न्यायालय में पक्ष रखते समय प्रामाणिक आंकड़ों, ठोस दस्तावेजों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।
बैठक को संबोधित करते हुए महादेव मालवी ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सभी सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक उद्देश्य समाज के उन वर्गों को शिक्षा, रोजगार और विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है, जो ऐतिहासिक रूप से विभिन्न असमानताओं का सामना करते आए हैं। श्री मालवी ने कहा कि अलग-अलग प्रयास करने के बजाय सभी संगठनों को साझा रणनीति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने आवश्यक आंकड़ों एवं दस्तावेजों का संकलन करने, विधि विशेषज्ञों से परामर्श लेने और शासन के समक्ष पिछड़ा वर्ग का पक्ष प्रभावी तरीके से रखने पर जोर दिया। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर संगठित, तथ्यपरक और समन्वित पहल समय की आवश्यकता है तथा सभी संगठनों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए मिलकर कार्य करना होगा।