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हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा...सुख-समृद्धि प्रदान करेंगी, पूरे नौ दिन रहेंगे नवरात्र

हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा...सुख-समृद्धि प्रदान करेंगी, पूरे नौ दिन रहेंगे नवरात्र
धर्म
10-Oct-26
छिंदवाड़ा अपडेट नवरात्र विशेष

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस बार नवरात्र की शुरुआत रविवार को चित्रा नक्षत्र में हो रही है। श्रीमद् देवी भागवत की मान्यता के अनुसार रविवार को नवरात्र आरंभ होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है।

हाथी पर सवार होकर मां का आगमन सुख-समृद्धि, आर्थिक प्रगति और कल्याण का सूचक माना गया है। साधना और उपासना करने वाले भक्तों के लिए भी यह नवरात्र विशेष फलदायी मानी जा रहा है। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार नवरात्र के आरंभ वाले दिन, जो वार होता है उसी के आधार पर मां के वाहन का निर्धारण होता है।

धार्मिक मान्यता में हाथी को स्थायित्व, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना गया है।

इस बार रविवार होने के कारण मां का वाहन हाथी रहेगा। धार्मिक मान्यता में हाथी को स्थायित्व, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस बार का नवरात्र सुख-समृद्धि की दृष्टि से अनुकूल और कल्याणकारी माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि के साथ कुछ क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव की स्थिति भी बन सकती है। भारतीय निर्यात नीति और उससे जुड़े आर्थिक पक्षों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता अनुभव हो सकती है।

नौ दिन का रहेगा नवरात्र पर्वकाल

इस बार किसी भी तिथि का क्षय नहीं होने से नवरात्र पूरे नौ दिन के रहेंगे। साधकों और उपासकों के लिए यह विशेष महत्व रखता है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व विशेष अनुष्ठान, साधना और संकल्पों की पूर्णता के लिए महत्वपूर्ण कालखंड माना जाएगा। नवरात्र के नौ दिनों में गृहस्थ कुल परंपरा अनुसार देवी की पूजा अर्चना करते हुए व्रत का नियमन करेंगे।

विशिष्ट योगों की साक्षी रहेगी खास

नवरात्र में देवी साधना के लिए योगों का विशेष महत्व है। इनमें अमृत सिद्धि, सर्वार्थसिद्धि व रवियोग विशेष माने गए हैं। इस बार नवरात्र के नौ दिन में 14 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि पर अमृत सिद्धि योग, 18 अक्टूबर को सप्तमी तथा 19 अक्टूबर को महाअष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग विद्यमान रहेगा। खास बात यह है कि इन तिथियों में रवियोग का संयोग भी रहेगा। इन शुभ योगों में साधना,आराधना के साथ भूमि, भवन, संपत्ति, वाहन, आभूषण, वस्त्र आदि की खरीदारी भी की जा सकती है।

शारदीय नवरात्रि शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर रविवार से शुरू हो रहा है। देवी पुराण में प्रातः के समय ही देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन करने को लिखा है/लेकिन जिसमें चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग को त्याग बताया है, किंतु इन दोनों के आदि के दो चरणों को त्याग कर घट स्थापना करने की अनुमति भी प्रदान की है।

आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा रविवार को चित्रा नक्षत्र रात 10.33 तक रहेगा और वैधृति रात 9.05 तक रहेगा/ उपरोक्त मतानुसार इस दिन चित्रा नक्षत्र के प्रथम दो चरण दिन के 10.08 तक और वैधृति योग के प्रथम दो चरण सुबह 9.34 तक रहेंगे, अतः इस बार शारदीय नवरात्र पर प्रातः काल में घट स्थापना नहीं की जा सकेगी/शास्त्रों में प्रातः काल के बाद देवी का आह्वान व घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय अभिजीत मुहूर्त ही माना है जो 11 अक्टूबर, रविवार को दोपहर 11.50 से 12.35 तक रहेगा/

इसके अलावा चौखड़ियों के हिसाब से घट स्थापना करने वाले 11 अक्टूबर के दिन सुबह 10.08 से 12.10 तक लाभ का उत्तरार्ध व अमृत चौघड़िये में घट स्थापना कर सकते हैं

घट (कलश) स्थापना मुहूर्त

चौघड़िया के हिसाब से

सुबह 10.08 से दोपहर 12.10 तक

अभिजीत मुहूर्त

दोपहर 11.50 से 12.35 तक

​पर्व का समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के साथ होगा, जिस दिन रावण दहन की परंपरा होती है

मां दुर्गा की मूर्ति स्थापना के नियम

यदि नवरात्रि के दौरान घर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं तो सबसे पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और देवी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा के स्थान पर स्वच्छ आसन बिछाकर मां की प्रतिमा को विराजमान करना चाहिए। देवी को लाल वस्त्र, चुनरी, फूल, फल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। प्रतिमा स्थापित करने के बाद नियमित रूप से सुबह और शाम मां की पूजा करना शुभ माना जाता है।

मां दुर्गा की कैसी होनी चाहिए प्रतिमा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में स्थापित की जाने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा शांत और सौम्य स्वरूप वाली रखना शुभ माना जाता है। प्रतिमा खंडित या किसी प्रकार से टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। पूजा के दौरान प्रतिमा को स्वच्छ रखना और श्रद्धा के साथ देवी की आराधना करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्रि में देवी पूजा का धार्मिक महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करते हैं और कन्या पूजन करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से देवी की आराधना करने से नकारात्मकता दूर होती है और मन में आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

साहस के साथ करें समस्याओं का सामना

शारदीय नवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें सत्य, धर्म और अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। मां दुर्गा की आराधना हमें यह संदेश देती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, साहस और विश्वास के साथ उनका सामना करना चाहिए। इसी भावना के साथ नवरात्रि में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करके भक्त उनके आशीर्वाद और कृपा की कामना करते हैं।



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जीवन में ऐसी कोई चीज नहीं है जिससे डरा जाये जरूरत केवल उसे समझने की है.!