श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
धर्म
29-Sep-26
नंद घर आनंद भयो के जयकारों पर झूमे श्रद्धालु, बांटी गई मिठाइयां

छिंदवाड़ा
स्थानीय श्री राम मंदिर मानस भवन में पितृ मोक्ष (श्राद्ध) पक्ष के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास परम पूज्य महामंडलेश्वर नागेंद्र ब्रह्मचारी जी महाराज ने कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों का मर्म समझाया और बताया कि प्रभु का धरती पर अवतरण केवल धर्म की रक्षा और अपने अनन्य भक्तों का उद्धार करने के लिए होता है।
पुण्य कभी निष्फल नहीं होते
कथा मर्मज्ञ नागेंद्र ब्रह्मचारी जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए सत्कर्म और पुण्य कभी नष्ट नहीं होते। जब-जब भक्तों पर विपत्ति आती है, तब-तब ईश्वर उनके कष्टों का निवारण करने स्वयं किसी न किसी रूप में प्रकट होते हैं। कथा के चौथे दिन ब्रह्मचारी जी ने अनेक पौराणिक व भक्तिमय प्रसंगों का सारगर्भित वर्णन किया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे भक्त प्रह्लाद एवं नृसिंह अवतार की कथा जिसमें ईश्वर की अटूट भक्ति और प्रह्लाद की रक्षा का जीवंत प्रसंग है। वामन अवतार व विट्ठल महिमा जिसमें भगवान वामन द्वारा राजा बलि के अहंकार का मर्दन तथा श्री विट्ठल भगवान की पावन महिमा का वर्णन है। माँ नर्मदा की महिमा जिसमें नर्मदा नदी के आध्यात्मिक महत्व का वर्णन और श्री सीताराम चरित जिसमें प्रभु श्री राम और माता सीता के विवाह से लेकर उनके वनवास गमन तक की मर्मस्पर्शी कथा का विवरण था।
नंद घर आनंद भयो से गूंजा प्रांगण
कथा के उत्तरार्ध में जैसे ही नन्हे बालक के रूप में भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य (जन्म) का प्रसंग आया, पूरा पंडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा। नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के भजनों पर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबकर झूमने और नाचने लगे। इस अवसर पर आयोजकों एवं श्रद्धालुओं द्वारा मिठाइयां बांटकर भगवान के जन्म की खुशियां मनाई गईं। कार्यक्रम का समापन महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें नगर के बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी बंधु एवं माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।