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जुन्नारदेव में नाट्यगंगा ने किया “श्री हनुमत लीला” का मंचन

जुन्नारदेव में नाट्यगंगा ने किया “श्री हनुमत लीला” का मंचन
धर्म
17-Oct-26
छिंदवाड़ा अपडेट

यूँ तो दो दशकों से अधिक की रंगयात्रा में नाट्यगंगा रंगमंडल ने अनेक स्थानों पर नाटकों का मंचन किया है और दर्शकों का भरपूर स्नेह एवं सराहना प्राप्त की है, लेकिन कुछ मंचन ऐसे होते हैं, जो कलाकारों के मन को भीतर तक छू जाते हैं। ऐसा ही एक अविस्मरणीय अनुभव विगत 15 अक्टूबर को जुन्नारदेव में प्राप्त हुआ, जहाँ नाट्यगंगा के 35 सदस्यीय दल ने श्री हनुमत लीला महा नाट्य का मंचन किया।

नाटक का मंचन बाजार चौक में होना है जहां दिन में छोटी-छोटी गुमठियाँ और दुकानें लगी हुई थीं। भव्य मंच तो तैयार था लेकिन दर्शक दीर्घा के स्थान पर दुकानें दिखाई दे रही थीं। कलाकार असमंजस में थे कि यहाँ दर्शकों के बैठने की व्यवस्था कैसे होगी? तभी समिति के सदस्यों ने बड़े विश्वास के साथ कहा, “आप शाम को जब आएँगे, तब इस स्थान का दृश्य कुछ और होगा। दुकानदार स्वेच्छा से अपनी दुकानें हटा लेंगे और सभी लोग मिलकर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था कर लेंगे।” सचमुच, शाम को पूरा बाजार चौक एक सुव्यवस्थित दर्शक दीर्घा में बदल चुका था। देखते ही देखते हजारों लोगों से दर्शक दीर्घा भर गई। पूरे बाजार चौक में तिल रखने की भी जगह नहीं बची।

इतनी विशाल भीड़ के बावजूद आश्चर्यजनक अनुशासन था। कहीं कोई अव्यवस्था नहीं, कहीं कोई शोर-शराबा नहीं। ऐसा लग रहा था मानो पूरा जुन्नारदेव इस आयोजन को अपना उत्सव मानकर उसमें सहभागी बन रहा हो। मंचन के दौरान दर्शकों ने तालियों और जयघोषों से हम कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। नाटक समाप्त होने के काफी देर बाद तक अनेक दर्शक कलाकारों से मिलते रहे, बातचीत करते रहे, तस्वीरें खिंचवाते रहे और अपने स्नेह एवं प्रशंसा से हमें अभिभूत करते रहे। कलाकारों को आश्चर्य तब हुआ जब इस समिति के सदस्यों ने इतना बड़ा आयोजन करके भी जिस सहजता, सरलता और विनम्रता का परिचय दिया, वह सचमुच अनुकरणीय है। 
समिति के जुझारू अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव का कलाकारों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प, आत्मीयता और सांस्कृतिक चेतना की अद्भुत मिसाल बनकर हमारी स्मृतियों में सदैव जीवित रहेगा। अंत में नाट्यगंगा रंगमंडल की ओर से श्रीरामलीला एवं दुर्गा उत्सव समिति, जुन्नारदेव का आभार व्यक्त किया गया।

जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से श्रीरामलीला एवं दुर्गा उत्सव समिति, जुन्नारदेव द्वारा यह आयोजन किया गया था। समिति द्वारा की गई आवास, स्वल्पाहार और भोजन की व्यवस्थाओं में इतनी आत्मीयता और अपनापन था कि जिससे सभी कलाकार भावविभोर हो गए।
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