केवट बने सांसद बंटी साहू ने भगवन राम को गंगा पार पहुंचाया
धर्म
11-Oct-26
दशरथ को हुआ महाशोक, त्यागी अपनी देह

छिंदवाड़ा अपडेट
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम द्वारा अवतरण उपरांत की लीलाओ का मंचन स्थानीय छोटी बाजार परिसर में सतत रूप से जारी है। वरिष्ठ कलाकार संतोष नामदेव ने जानकारी दी कि बीती रात प्रांगण एक मार्मिक प्रसंग का साक्षी बना। मंचन के पांचवे दिन श्री दशरथ देह त्याग की लीला खेली गई। महामंत्री सुमंत के साथ राम लक्ष्मण और सीता वन की ओर निकल पड़ते है। मार्ग में उन्हें राजा गुह, केवट एवं निषादराज आदि लोग मिलते है। केवट श्रीराम को गंगा पार करवाते हैं।
गंगा पार के बदले जब श्रीराम केवट को उतराई देते है तब केवट यह कहकर मना कर देते है कि जिस प्रकार मैने आपको गंगा से पार करवाया हूँ उसी प्रकार आप मुझे भवसागर से पार करवा देना। इस प्रकार श्री राम अपने अनुज लक्ष्मण एवं भार्या जानकी के साथ तमसा तट तक पहुँचते है। इधर अयोध्या के महामंत्री सुमंत को खाली हाथ लौटते देख तथा उनके साथ श्री राम को ना पाकर दशरथ को महाशोक होता है। दशरथ के नेत्रों के सामने श्रवण कुमार के माता पिता द्वारा गया श्राप दिखाई देने लगता है एवं कानो में उनकी आवाज गूंजने लगती है। दशरथ पुत्र शोक में बार बार व्याकुल होते है एवं शोक संतृप्त होकर वे अपना देह त्याग देते हैं।
इन्होंने निभाया बेहतरीन किरदार, सांसद बने केवट
समिति के तरुण जैन ने बताया कि विगत वर्ष सांसद विवेक बंटी साहू राजा जनक की भूमिका में दिखाए दिए थे इस वर्ष वह केवट की मार्मिक भूमिका में नज़र आये, सांसद को अभिनय करते देखने दर्शको की संख्या अप्रत्याशित थी। निषादराज की भूमिका में बाबुल सिंगारे नज़र आए। दशरथ की शसक्त भूमिका में श्रांत चंदेल दिखाई दिए इसके साथ ही श्री राम की प्रमुख भूमिका में रजत पांडे , वही सीता की भूमिका प्रज्ञांश शुक्ल अदा कर रहें है, लक्ष्मण काअभिनय आयुष शुक्ला द्वारा निभाया जा रहा है। कैकई के किरदार में धीरज डेहरिया रहे। संरक्षक राजू माहोरे महामंत्री सुमंत के रुपए में दिखे। सुमित्रा के किरदार में जय मालवी, कौशल्या की भूमिका में अजय चौकसे दिखाई दिए।
12 अक्टूबर को मंचित होगा भरत मिलाप का प्रसंग
समिति के समकित जैन एवं तेजस्व चौरसिया ने बताया कि आज श्री रामलीला मंच पर भरत मिलाप की लीला खेली जाएगी। विगत वर्षाे से भरत मिलाप के प्रसंग को देखने के लिए जनता का अपार समूह प्रांगण में उपस्थित हुआ था। प्रतिवर्ष इस लीला को देखने वाले की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।