70 प्रतिशत से अधिक लोगों ने धार्मिक आयोजनों में बढ़ते दिखावे बताया गलत
छिंदवाड़ा
23-Sep-26
छिंदवाड़ा अपडेट के जनमत में आम नागरिकों ने रखी अपनी राय
छिंदवाड़ा
विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा धार्मिक त्योहारों पर बढ़ता आडंबर और दिखावा अब आम शहरवासियों को रास नहीं आ रहा है। त्योहारों के नाम पर हो रही फिजूलखर्ची, शोर-शराबे और औपचारिकता को लेकर नागरिकों के बीच अच्छी-खासी नाराजगी और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है। जनसरोकार से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर छिंदवाड़ा अपडेट द्वारा पिछले सप्ताह एक विशेष डिजिटल जनमत (पोल) आयोजित किया गया था, जिसमें शहर की जनता ने बेबाकी से अपनी राय साझा की है।
जनमत में नागरिकों से सवाल पूछा गया था धार्मिक त्योहारों पर बढ़ते दिखावे को लेकर आपका क्या मत है? इस पोल में जनता की राय बिल्कुल साफ और स्पष्ट नजर आई। अधिकांश लोगों ने त्योहारों के मूल स्वरूप और उसकी सादगी को बनाए रखने की वकालत की है।
जनमत के आंकड़े : जनता का स्पष्ट संदेश
पोल में शामिल नागरिकों को तीन विकल्प दिए गए थे, जिनके नतीजे इस प्रकार रहे:-
- गलत है: 70.8 प्रतिशत मत
सबसे अधिक 70.8 प्रतिशत नागरिकों ने धार्मिक आयोजनों में बढ़ते दिखावे, भारी-भरकम बजट और दिखावेबाजी को पूरी तरह गलत ठहराया। लोगों का मानना है कि आस्था मन का विषय है, न कि प्रदर्शन का। कुछ लोगों ने व्यक्तिगत मैसेज कर कहा कि डीजे के जानलेवा साउंड पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।
- सही है: 25.0 प्रतिशत मत
पोल में 25 प्रतिशत लोगों ने इस बदलाव को सही माना। उनका तर्क है कि बड़े आयोजनों से समाज में भव्यता और युवाओं में उत्साह का संचार होता है। इनका मानना है कि भव्यता के कारण ही लोग धार्मिक आयोजनों से जुड़ते हैं और इससे जुड़े व्यवसायियों को धनलाभ होता है। उनका व्यापार बढ़ता है।
- कह नहीं सकते: 4.2 प्रतिशत मत
वहीं, मात्र 4.2 प्रतिशत मतदाता ऐसे रहे जिन्होंने इस मुद्दे पर अपनी कोई स्पष्ट राय व्यक्त नहीं की या तटस्थ रहे।
- शहरवासियों का दर्द: आस्था कम, प्रतिस्पर्धा ज्यादा
- प्रतिस्पर्धा का रूप लेते आयोजन : अब आयोजनों में भक्ति भाव से ज्यादा इस बात की होड़ रहती है कि किसका मंच, साउंड सिस्टम या डीजे कितना बड़ा और महंगा है।
- आम जनजीवन प्रभावित : देर रात तक तेज आवाज में बजने वाले डीजे, ट्रैफिक जाम और सड़कों पर बनते बड़े-बड़े पंडालों से मरीजों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सद्भाव और सादगी की जरूरत
शहर के प्रबुद्ध जनों का मानना है कि धार्मिक कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, शांति और सेवा होना चाहिए। यदि दिखावे में खर्च होने वाले बजट को समाज सेवा, शिक्षा या जरूरतमंदों की मदद में लगाया जाए, तो त्योहारों की सार्थकता कई गुना बढ़ जाएगी।
छिंदवाड़ा अपडेट की अपील
धार्मिक परंपराएं और त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इनकी पवित्रता और सादगी को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आयोजकों को चाहिए कि वे जनभावनाओं का सम्मान करते हुए आयोजनों को आडंबरमुक्त और पर्यावरण-अनुकूल बनाएं।