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किसानों ने खेतों में पराली और नरवाई जलाई तो होगी एफआईआर

किसानों ने खेतों में पराली और नरवाई जलाई तो होगी एफआईआर
कृषि जगत
12-Oct-26

पराली जलाने की घटनाओं पर प्रतिबंध, सैटेलाइट से भी हो रही निगरानी

छिन्दवाडा अपडेट

खरीफ मौसम 2026 में मक्का, धान सहित अन्य फसलों की कटाई शुरू होने के साथ ही खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी हरेंद्र नारायन ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत जारी इस आदेश के अनुसार, छिन्दवाड़ा जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली एवं नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, जन एवं संपत्ति की सुरक्षा तथा लोक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा।

नरवाई जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता होती है खराब 

कलेक्टर श्री नारायन ने बताया कि फसल कटाई के बाद खेतों में बचे डंठलों, पराली एवं नरवाई को जलाकर खेत साफ करने की प्रवृत्ति से पर्यावरण और कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष जलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके साथ ही खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है और फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद का काम करती है नरवाई

खेतों में पड़ा फसल अवशेष, भूसा और डंठल सड़कर भूमि में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने तथा मिट्टी को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाने में सहायक होते हैं। इन्हें जलाकर नष्ट करने से भूमि को मिलने वाला यह प्राकृतिक लाभ समाप्त हो जाता है। पराली एवं नरवाई में आग लगाने से केवल संबंधित किसान के खेत को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि आग अनियंत्रित होने पर आसपास के खेतों में खड़ी फसलों, प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जंतुओं और सार्वजनिक संपत्ति को भी क्षति पहुंच सकती है। इससे गंभीर अग्नि दुर्घटनाओं एवं जनहानि की आशंका बनी रहती है। पूर्व वर्षों में भी इस प्रकार की घटनाओं के कारण व्यापक संपत्ति का नुकसान हुआ है तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की परिस्थितियां निर्मित हुई हैं।

पराली जलाने की घटनाओं पर प्रतिबंध, सैटेलाइट से भी हो रही निगरानी

उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, खरीफ मौसम 2026 में जिले में मक्का, धान सहित अन्य फसलों की कटाई के बाद पराली एवं नरवाई जलाने की घटनाएं होने की आशंका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा ऐसी घटनाओं की सैटेलाइट मैपिंग की जा रही है। पर्यावरण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में भी फसल अवशेषों को खेतों में जलाने पर प्रतिबंध तथा उल्लंघन की स्थिति में दण्डात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लागू किया गया है।

कलेक्टर श्री नारायन द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने के स्थान पर उनके उचित प्रबंधन के लिए वैकल्पिक कृषि यंत्रों एवं उपलब्ध तकनीकों का उपयोग करें। जिले में अनेक किसान रोटावेटर तथा अन्य कृषि यंत्रों की सहायता से खेतों में बचे डंठलों का प्रबंधन कर रहे हैं। इससे पराली एवं नरवाई जलाने की आवश्यकता कम की जा सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।

कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग अनिवार्य

कलेक्टर श्री नारायन द्वारा जारी आदेश में जिले में संचालित कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम की उपलब्धता एवं उपयोग की सतत निगरानी की जिम्मेदारी जिला परिवहन अधिकारी तथा सहायक कृषि अभियांत्रिकी, जिला छिन्दवाड़ा को सौंपी गई है। संबंधित अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कंबाइन हार्वेस्टर का संचालन निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप हो। बिना स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में खरीफ मौसम 2026 में लगाई गई मक्का, धान आदि फसलों की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली एवं नरवाई में आग लगाना प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दण्डनीय होगा।

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