आर या पार का मन बना चुके जनपद उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ?
लेख
11-Oct-26
भाजपा से मोहभंग या कुछ और मजबूरी ?
समीक्षक: राम कुमार विश्वकर्मा

छिंदवाड़ा अपडेट
राजनीतिक पिच पर कांग्रेस की ओर से शानदार बैटिंग करने वाले चैम्पियन राजनेता अमित सक्सेना ने पिछले लोकसभा चुनाव के समय विपक्षी टीम यानि भाजपा को ज्वाइन किया था और तत्त्कालीन चुनाव में इसका फायदा भी भाजपा को हुआ। तब कयास लगाए जा रहे थे कि यहां भी वे चैम्पियन की तरह ही खेलेंगे लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। कारण बताओ नोटिस राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बन गया है। कोई कह रहा कि उनका भाजपा से मोहभंग हो गया है तो कोई कह रहा है उन्हें वैसा नहीं खेलने दिया जा रहा जैसा वे कांग्रेस में खेलते थे।
कुछ राजनीतिक सूत्र कह रहे हैं जरूर कुछ ऐसा हुआ है जिसके कारण उन्हें कांग्रेस छोड़ने का मलाल सताने लगा। क्षेत्र में होने वाला आंदोलन तो एक बहाना है। कांग्रेस के पूर्व सांसद से किसी बात को लेकर उनकी नाराजगी थी लेकिन इच बीच कहीं न कहीं कांग्रेस के सर्वोच्च व सर्वमान्य नेता कमलनाथ से दूरियां उनके मन को विचलित कर रही थी।
राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि बीच के अंतराल में स्वास्थ्य खराब होने के कारण अंमित सक्सेना की राजनीतिक सक्रियता में काफी कमी आ गई थी। इसके अलावा उन्हें जब अपनों के साथ की आवश्यकता थी जिनके भरोसे वे भाजपा में गए थे ऐसे कठिन समय में उन्हें न अपनों का साथ मिला न उनका जिनके भरोसे उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी। कहा जा रहा है कि यही वह वजह बनी जिसके कारण भाजपा ज्वाईन करने का भरोसा टूट गया। इस अत्यंत कठिन समय में उन्होंने ही साथ दिया जिनसे नाराजगी नहीं थी लेकिन तत्कालिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाईन की थी। राजनीतिक सूत्र का कहना है कि भले ही उन्होंने मजबूरी में कांग्रेस छोड़ी लेकिन उनका मन भाजपा में पूरी तरह कभी नहीं लगा।
कारण कुछ भी हो लेकिन यदि भविष्य में कांग्रेस में उनकी वापसी होती है तो भाजपा के लिए एक बड़ा झटका तो होगा ही साथ ही कहीं न कहीं कांग्रेस को मजबूती भी मिलेगी। वैसे भी वर्तमान स्थितियों में कांग्रेस एक बार फिर से अपना खोया हुआ सम्मान पाने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने का मन बना चुकी है। कांग्रेस की पहली कोशिश होगी की नाराज नेताओं की वापसी हो इससे उस क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह बनेगा और कांग्रेस मजबूत होगी। वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस को इसकी महतीं आवश्यकता भी है।
देखना है भाजपा अमित सक्सेना की वापसी को रोक पाती है या नहीं? यदि अमित सक्सेना भाजपा छोड़ते है तो केवल अमित सक्सेना ही नहीं आने वाले समय में अन्य नेताओं की भी वापसी के दरवाजे खुल जाएंगे। पिछले चुनाव में कांग्रेस में भगदढ़ मची थी भविष्य में कहीं भाजपा में यही स्थिति न बन जाए। यदि ऐसी स्थिति बनती है तो भाजपा जिलाध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों पर भी इसका राजनीतिक असर दिखाई देगा। संगठन की मजबूती कमजोर होगी तो वहीं जनता का आधार भी कहीं न कहीं खिसकेगा। सत्तासीन भाजपा पार्टी और उनके जनप्रतिनिधियों को समय रहते सजगता और बुद्धिमानी दिखानी होगी नहीं तो जीता हुआ किला अगले चुनाव में हार भी सकते हैं?