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43 वर्ष 5 दिवस की गौरवपूर्ण सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए डॉ. लक्ष्मीचंद

43 वर्ष 5 दिवस की गौरवपूर्ण सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए डॉ. लक्ष्मीचंद
शिक्षा
02-Oct-26
शिक्षा-साहित्य के क्षेत्र में छोड़ी अमिट छाप

छिंदवाड़ा अपडेट

एक शिक्षक की पहचान केवल उसके द्वारा पूरी की गई सेवा अवधि से नहीं होती, बल्कि उन संस्कारों, ज्ञान और विचारों से होती है, जिन्हें वह आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाता है। इसी भावना को अपने सेवाकाल में चरितार्थ करने वाले डॉ. लक्ष्मीचंद ने राजभाषा एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 43 वर्ष 5 दिवस की गौरवपूर्ण शासकीय सेवा पूर्ण कर 30 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्ति ग्रहण की।

अध्यापन, शोध और लेखन में कई उपलब्धियां

डॉ. लक्ष्मीचंद की सेवायात्रा अध्यापन, साहित्य, शोध, लेखन एवं उच्च शिक्षा प्रशासन के विविध आयामों से समृद्ध रही। अध्ययनकाल में उन्होंने उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित करते हुए दो गोल्ड मेडल प्राप्त किए। शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने 112 ई-कंटेंट एवं 2 लाइव वीडियो तैयार किए। इसके साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख प्रकाशित हुए।

अनेक महत्वपूर्ण पदों पर निभाई जिम्मेदारियां

डॉ. लक्ष्मीचंद ने अध्यापन के साथ-साथ उच्च शिक्षा प्रशासन में भी अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। वे राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा के कला एवं विधि संकाय के अधिष्ठाता (डीन) तथा मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
इसके अलावा देवरी (सागर), पांढुर्ना, बालाघाट, चांद, उमरानाला एवं छिंदवाड़ा के महाविद्यालयों में अध्यापन एवं प्रशासनिक सेवाएं प्रदान कीं। सेवाकाल के अंतिम चरण में उन्होंने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, छिंदवाड़ा के प्राचार्य के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।

शुभचिंतकों ने सुखी, समृद्ध और दीर्घायु की कामना की

सेवानिवृत्ति के अवसर पर समस्त परिजनों, मित्रों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों एवं शुभचिंतकों ने डॉ. लक्ष्मीचंद को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। सभी ने उनके स्वस्थ, सुखी, समृद्ध एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। शुभचिंतकों ने कहा कि सेवानिवृत्ति उनके शासकीय दायित्वों का विराम है, ज्ञान-साधना का नहीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. लक्ष्मीचंद अपने अनुभव, लेखन, चिंतन एवं राजभाषा के प्रति समर्पण के माध्यम से भविष्य में भी शिक्षा, साहित्य और समाज को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।
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