भरत मिलाप ने लाए दर्शकों की आंखों में आंसू, भावुक हुआ प्रांगण
धर्म
12-Oct-26
भरत ने ठानी ज़िद, नही रह सकूंगा श्री राम के बिन

छिंदवाड़ा अपडेट
सोमवार को रामलीला में राम-भरत मिलाप की लीला खेली गई जिसमे भरत को महाराज दशरथ के देह त्याग की जानकारी लगते ही गहरा आघात पहुँचता है। दुख की पराकाष्ठा तब हो जाती है जब उन्हें पता चलता है कि श्री राम वन गमन कर गए हैं और इस महान दुख का कारक और कोई नही बल्कि स्वयं भरत की माँ केकई है।
भरत को जब राम के वन गमन की जानकारी प्राप्त होती है तब वह पिता के मृत्यु के दुःख को भी विसरा कर राम के वियोग में दुखी हो जाते है। इसके बाद भरत अपने पिता महाराज दशरथ को अंतिम विदाई देकर चित्रकूट की ओर जहां श्री राम निवास कर रहे थे जाने की हठ करते है। दौड़े दौड़े चित्रकूट पहुँच कर श्रीराम के गले लग कर रो पड़ते हैं। श्रीराम द्वारा समझाने पर उनकी चरण पादुका सर पर रख कर लौट जाते हैं। श्री राम ने कहा कि भरत पर कोई संदेह नहीं कर सकता, उनका चरित्र परम पावन है।
लीला के अंतिम क्षणों में जैसे राम भक्त ले चला राम की निशानी गाना चला तो परिसर में उपस्थित सभी दशकों की आंखे आंसुओ से भर गई। संरक्षक वीरेंद्र शुक्ल ने जानकारी दी कि बीती रात श्री रामलीला रंगमंच परिसर एक मार्मिक प्रसंग का साक्षी बना। भरत मिलाप की लीला में भरत के रूप में दिखे मंडल के मीडिया प्रभारी एवं सहनिर्देशक ऋषभ स्थापक जिन्होंने जीवंत अभिनय कर भरत के किरदार को सार्थकता प्रदान की। श्रीरामलीला मण्डल के सचिव राजेंद्र आचार्य ने बताया कि दिन प्रतिदिन रामलीला देखने जन मानस की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। श्री राम के रूप में रजत पांडे ने अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं। सीता बने हैं प्रज्ञांश शुक्ला, लक्ष्मण का अभिनय आयुष शुक्ल कर रहे हैं। शत्रुघ्न बने प्रभव शुक्ल ने अपने पात्र के साथ न्याय किया, केकई का कुशल अभिनय धीरज डेहरिया ने किया। कौशल्या के रूप में अजय चौकसे नज़र आए। सुमित्रा का पात्र जय मालवी ने निभाया। मंथरा का षड्यंत्रकारी के द्वार डॉ पवन नेमा ने बखूबी निभाया। निदाशराज के रूप में बाबुल सिंगारे एवं केवट के रूप में संतोष नामदेव रहे।
मंगलवार को पंचवटी प्रवेश और रावण-मारीच संवाद का मंचन
वरिष्ठ कलाकार उत्तम सोनी ने बताया कि आज चित्रकूट से आगे बढ़कर श्री राम माता सीता और लक्ष्मण एक नई जगह की तलाश में पंचवटी पहुंचेंगे जहां का मनोरम दृश्य देखते हुए वहीं रुकने का निर्णय लिया जाएगा इस दौरान स्वरूप नखा की नाक काटी जाएगी तथा खर दूषण वध होगा जिस से क्रुद्ध होकर रावण मारीच को स्वर्ण मृग बनने का दबाव बनाएगा।