कुंडीपुरा चौकी में छात्राओं ने की करीब दो घंटे नारेबाजी
छिंदवाड़ा
14-Aug-26
प्रभारी और पूर्व अधीक्षिका की राजनीति का शिकार आदिवासी कन्या छात्रावास
वर्तमान अधीक्षिका को हटाने की मांग; पूर्व अधीक्षिका को वापस लाने की मांग पर भी अड़ी छात्राएं

छिंदवाड़ा
स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले कन्या शिक्षा परिसर की आदिवासी छात्राओं के पुलिस चौकी पहुंचने से जनजातीय कार्य विभाग की छात्रावास व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े हो गए। छात्राओं ने छात्रावास की अधीक्षिका पर कथित अभद्र व्यवहार और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाते हुए धरमटेकरी चौकी में शिकायत की। छात्राओं ने करीब दो घंटे तक चौकी में नारेबाजी करते हुए अधीक्षिका को हटाने की मांग की।
छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने और विभिन्न तरीकों से परेशान किए जाने की शिकायत उन्होंने पुलिस के सामने रखी। छात्राओं का कहना था कि उनकी समस्याओं का छात्रावास स्तर पर समाधान नहीं हो रहा था, जिसके चलते उन्हें पुलिस चौकी तक आना पड़ा।
पूर्व अधीक्षिका को वापस लाने की मांग
विरोध के दौरान छात्राओं ने पूर्व अधीक्षिका अनीता दाहिया को दोबारा जिम्मेदारी देने की मांग भी रखी। बताया गया कि सहायक आयुक्त द्वारा पूर्व में अनीता दाहिया को अधीक्षिका के पद से हटाया गया था। वहीं छात्राओं ने वर्तमान व्यवस्था को लेकर असंतोष जताते हुए पूर्व अधीक्षिका रजनी उईके को वापस हटाने की मांग भी रखी। पूरे मामले में छात्राओं की मांगों को लेकर विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
रजनी उईके बोलीं- मैंने चार्ज ही नहीं लिया
मामले में वर्तमान अधीक्षिका रजनी उईके ने छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि उन्होंने अभी तक छात्रावास का चार्ज ही नहीं लिया है। पुरानी अधीक्षिका के कोर्ट से स्टे लेकर आने के कारण उन्हें अभी प्रभार नहीं मिला है। ऐसे में छात्राओं को भोजन नहीं देने या प्रताड़ित करने का सवाल ही नहीं उठता।
रजनी उईके ने आरोप लगाया कि किसी ने सुनियोजित तरीके से छात्राओं को उनके खिलाफ थाने भेजा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले छात्राओं के चौकी पहुंचने के मामले की जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि छात्राएं किसकी अनुमति से छात्रावास से बाहर निकलीं।
दो घंटे तक चौकी में गूंजते रहे नारे
छात्राओं के चौकी पहुंचने के बाद काफी देर तक नारेबाजी का दौर चलता रहा। पुलिस ने छात्राओं की शिकायत दर्ज किए जाने की बात कही है। अब मामले में जनजातीय कार्य विभाग की ओर से जांच और कार्रवाई का इंतजार है।
अधिकारी जनविश्वास अभियान में रहे व्यस्त
बताया गया कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत जिला स्तर के अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों के दौरे पर थे। इसके चलते छात्राओं की शिकायत के समय तत्काल विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी नहीं हो सकी। हालांकि मामला सामने आने के बाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्राओं की शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की है।
सवाल: छात्राओं को चौकी तक क्यों आना पड़ा?
आदिवासी छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और आवासीय व्यवस्था की जिम्मेदारी जनजातीय कार्य विभाग की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि छात्रावास में ही शिकायतों का समाधान नहीं होने पर छात्राओं को पुलिस चौकी तक क्यों पहुंचना पड़ा? यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कौन करेगा और यदि आरोप निराधार हैं तो छात्राओं को चौकी तक ले जाने की परिस्थितियां किसने पैदा कीं? फिलहाल छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग छात्राओं की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।