तनाव, चिंता, अवसाद से कैसे बाहर निकले, दी जानकारी
स्वास्थ्य
23-Sep-26
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया मानसिक स्वास्थ्य का प्रशिक्षण
खमारपानी स्वास्थ्य केंद्र में लगा मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण

छिन्दवाडा
ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा जिले के विकासखंड बिछुआ में संचालित सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खमारपानी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आज एक दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान, प्रारंभिक स्तर पर सहयोग, प्रभावी संवाद तथा आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति को उचित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
संकेतों से समझे मानसिक स्वास्थ्य
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र में बच्चों, महिलाओं और परिवारों के साथ निरंतर संपर्क में रहती हैं। ऐसे में वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेतों को पहचानने और जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यशाला में तनाव, चिंता और अवसाद के सामान्य लक्षणों, व्यवहार एवं भावनात्मक बदलाव, सामाजिक गतिविधियों से दूरी, नींद एवं खान-पान में बदलाव, लगातार उदासी या बेचौनी तथा दैनिक कार्यों में रुचि कम होने जैसे संकेतों की पहचान के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों और महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी व्यवहारिक एवं भावनात्मक बदलावों को समझने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
क्यों होता है मन मस्तिष्क में चिड़चिड़ा
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्ति से सम्मानपूर्वक एवं बिना किसी भेदभाव के बातचीत करना, उसकी बात ध्यान से सुनना, उसे दोषी या कमजोर न ठहराना तथा आवश्यकता होने पर परिवार को उचित स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर समाज में प्रचलित मिथकों, अंधविश्वास और गलत धारणाओं को दूर करने में समुदाय स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
उचित उपचार से मिलता है बेहतर जीवन
संस्था समन्वयक आशीष पाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह हैं। समय पर पहचान, संवेदनशील संवाद और उचित उपचार से व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समुदाय और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर सकती हैं। उनका उद्देश्य केवल समस्या की पहचान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को सही समय पर उचित सहायता और उपचार से जोड़ना भी है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति रहे जागरूक
स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवाशीष भारद्वाज ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उचित उपचार संभव है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाएं और किसी व्यक्ति में गंभीर या लगातार लक्षण दिखाई देने पर उसे स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहयोग करें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य संदर्भ पुस्तिका, हेल्पलाइन नंबर एवं टेली-काउंसलिंग सेवाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।
कार्यशाला में स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवाशीष भारद्वाज, संस्था समन्वयक आशीष पाल, महिला स्वास्थ्य निरीक्षक श्रीमती आई. बुनकर, संस्था से वीरेंद्र घागरे, सुश्री मानसी चौरसिया, निखिल डोंगरे, रितेश गाडगे एवं सुश्री संध्या उमरेठे सहित विभिन्न ग्रामों में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित थी।